तृतीय समूह



वास्तविक विजय ध्वज
भारत पर भगवान का उद्बोधन

लगभग ढाई दशक पूर्व भारतीय स्वतंत्रता दिवस के दिन स्वामी ने अपने विश्वविद्यालय के छात्रों से बात करते हुए कहा था कि युवा मन को आदर्शों और मूर्तियों को अपने समक्ष स्थापित करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता का असली अर्थ क्या है। इस संदर्भ में 15 अगस्त 1985 को दिए गए स्वामी के दिव्य प्रवचन से कुछ अंश यहाँ उद्धृत हैं।



स्वातंत्र्य और स्वराज्य का अर्थ

आज हम जिस स्वतंत्रता का जश्न मनाते हैं उसे अंततः 14 अगस्त 1947 को मध्य रात्रि को हासिल किया गया और घोषित किया गया था। वास्तव में "स्वतंत्रता" शब्द का क्या अर्थ है?

इसका मतलब है कि हम किसी पर निर्भर नहीं हैं। हम आत्मनिर्भर हैं। स्वतंत्रता के लिए, भारतीय शब्द स्व-तंत्र है। इसका अर्थ है हमारा तंत्र। तंत्र शब्द का अर्थ है "आत्म", इसलिए स्वातंत्र्य का अर्थ है आत्म को छोड़कर हर चीज से स्वतंत्रता।

प्रत्येक को उसके हृदय का पालन करना चाहिए। वही हमारा एकमात्र गुरु और भगवान है। दूसरों पर निर्भरता नहीं होना चाहिए। यह स्वराज्य की स्थिति है। स्वराज्य शब्द आमतौर पर एक स्वराज्य के लिए उपयोग किया जाता है पर असल में यह सांसारिक निर्भरता की अनुपस्थिति को दर्शाता है। स्वतंत्रता का आनंद मनुष्य तभी ले सकता है जब उसे इंद्रियाँ के बंधन से छुटकारा मिल जाए, जो उसे सांसारिक प्रलोभनों की ओर घसीटती हैं। योग की प्राप्ति, इंद्रिय नियंत्रण, प्रेम का विस्तार और चेतना की शुद्धि, यही सच्चा लक्ष्य है। ऐसा होने पर ही प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में ईश्वर की महिमा झलक सकती है।

विजय का असली झंडा

अपनी मातृभूमि के लिए प्यार अच्छा है पर इससे दूसरों की मातृभूमि के लिए घृणा पैदा नहीं होना चाहिए। तुम्हारी प्रार्थना होनी चाहिए "प्रत्येक व्यक्ति सर्वत्र खुश और शांति पूर्ण रहे। " जब विश्व में शांति और समृद्धि होगी, तभी भारत भी शांतिपूर्ण और प्रसन्न रह सकता है। तुम्हारी प्रसन्नता एवं शांति, विश्व की प्रसन्नता और शांति से जुड़ी हुई है। तुम्हारे द्वारा की गई घृणा अथवा हिंसा का कोई भी कार्य दुनिया के वातावरण को प्रदूषित करेगा। जब तुम किसी भी प्राणी से प्रेम करते हो, तो वह आराधना ईश्वर तक पहुँचती है क्योंकि वह हर प्राणी में विद्यमान है। इसी प्रकार किसी भी जीव का अपमान भी ईश्वर तक पहुँचता है। इसलिए सभी जगह, सभी के प्रति प्रेम का विस्तार करो।



ध्वज विजय का प्रतीक है, स्वतंत्रता की खुशी का। प्रत्येक राष्ट्र का अपना एक झंडा होता है। अन्य ध्वज पर भी ध्यान दो। वे भी प्रशंसनीय जीत के प्रतीक हैं। उन्हें भी सम्मान प्रदान करो। यही हमारे अन्दर का सहज भाव, जुनून, उमंग की भावना को दर्शाता है। जब आप इस जीत को हासिल कर लेंगे तब आप भारतीय संस्कृति के सच्चे उत्तराधिकारी बन जायेंगे।

- श्री सत्य साई इंस्टीट्यूट ऑफ हायर लर्निंग, प्रशांति निलयम में 15 अगस्त 1985 को स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए दिव्य प्रवचन से लिया गया।

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बाघ - चित्रकारी

बाघ भारत देश का राष्ट्रीय पशु है।

सीखे गये मूल्य:
बाघ के सामान, हमें साहसी और जीवन में अड़चनों का सामना करने की शक्ति सीखना चाहिए।

गतिविधि - बाघ के पदचिन्ह:

यह एक बहुत प्यारी सी गतिविधि है। इसमें बच्चों के हस्त छाप का उपयोग करते हैं।

आवश्यक सामग्री:
  1. A4 माप के कुछ सफेद कागज़/ चार्ट पेपर
  2. नारंगी एवं काला रंगलेप (पेंट)
  3. एक तूलिका (पेंटब्रश)
तैयार हो जाओ:

राष्ट्रीय पशु के बारे में कुछ चर्चा करें। उसकी घटती आबादी, उसके संरक्षण के महत्व एवं उससे सम्बंधित परियोजनाओं को बताएं। बच्चों को इस प्रतापवान पशु से सीखने लायक मूल्यों को बताएं।

गतिविधि:

पीले रंग के पेंट को बच्चे के हाथ में लगाएं और चार्ट पेपर में उसका छाप लें। उस पर ब्रश से काले रंग की धारियाँ बनाएं। बाघ के पदचिन्ह तैयार!

मोर - पेपर प्लेट हस्तकला



मोर हमारा राष्ट्रीय पक्षी है। यह सौम्यता, सुंदरता, गौरव और गूढ़ता का प्रतीक है।

सीखे गए मूल्य:

मोर के भव्य सौंदर्य को देखकर, हम अपने आतंरिक सौंदर्य को गहराई से देखें ।प्रेम, दया, क्षमा जैसे आकर्षक गुण हमारे आतंरिक सौंदर्य को दर्शाते हैं। इन गुणों को हम विकसित करें।

आवश्यक सामग्री:
  1. पेपर प्लेट
  2. नीले और हरे रंग के पेंट
  3. पेंट ब्रश
  4. पीले रंग का पेपर
  5. हरे रंग का पेपर
  6. अनुक्रम (सीक्वेंस)
तैयार हो जाओ:

राष्ट्रीय पक्षी और उसके सुन्दर परों के बारे में चर्चा करें। इस भव्य पक्षी से सीखे जाने वाले मूल्यों की भी चर्चा करें।

गतिविधि:

  • पेपर प्लेट को नीले एवं हरे रंग से पेंट करें।
  • जैसे चित्र में दिखाया गया है, वैसे नीले रंग के कागज़ से मोर का कट आउट बनाएं।
  • पीले रंग की चोंच और आँखें बनाकर चिपकाएं।
  • मोर के कट आउट को पेपर प्लेट पर चिपकाएं।
  • उसे सीक्वेंस (अनुक्रमों) से सजाएं।

भारतीय ध्वज - समुच्चित चित्र (कोलाज)



हमारे त्रि रंग ध्वज में रंगों के गहरे अर्थ हैं। केसरिया रंग देश की ताकत और साहस को दर्शाता है। हरा भूमि की उर्वरता को दर्शाता है और सफेद शांति को इंगित करता है। २४ तीलियों सहित नीला पहिया धर्म चक्र को दर्शाता है।

सीखे गये मूल्य:
  1. केसरिया: हम मजबूत बनें और हमारे डर को दूर करें ।
  2. हरा:आइए हममें अच्छे संस्कारों का बीज बोएं और खुशियाँ फैलाएं।
  3. सफेद:हमारे विचारों और कार्यों को शांतपूर्ण और शुद्ध होने दें ।
  4. धर्म चक्र: सही मार्ग का अनुसरण करें ।

यह गतिविधि एक कोलाज है। रंगीन कागजात को बिट्स और टुकड़ों में फाड़ने और उन्हें एक साथ रखने का मज़ा है। बच्चे इस गतिविधि को बहुत कम मार्गदर्शन के साथ स्वतंत्र रूप से कर सकते हैं।

आवश्यक सामग्री:
  • सफेद चार्ट पेपर
  • क्रेप पेपर (नारंगी, हरा और नीला)
  • ग्लू स्टिक
तैयार हो जाओ:

हमारे राष्ट्रीय ध्वज के महत्व पर चर्चा करें। इस अवसर पर भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बारे में बात करें। अहिंसा और कुछ महान नेताओं के बारे में बात करें।

गतिविधि:

बच्चों को टुकड़ों में क्रेप पेपर को फाड़ने में मज़ा आ सकता है। रंगीन कागज के तीन ढेर (नारंगी, हरा और नीला) बनाए जा सकते हैं। बच्चे ढेरियों से कागज के टुकड़े ले सकते हैं। वे एकता के साथ साझा करना और काम करना सीखते हैं। आखिरकार, एकता एक प्रमुख कारक था जो भारतीयों को अंग्रेजों को हटाने के लिए सक्षम बनाता था!

आम - लेखनदस्ता (नोट पैड) बनाना



फलों के राजा आम का वर्णन वाल्मीकि रामायण में भी पाया जाता है। यह अनूठा फल कच्चे या पके रूप, दोनों में ही इस्तेमाल किया जा सकता है।

सीखे गए मूल्य:

आम के मिठास के समान, हम भी अपने शब्दों एवं कार्यों से मिठास फैलाएं।

आवश्यक सामग्री:
  • पीले एवं हरे रंग का चार्ट पेपर
  • A4 माप के कुछ सफेद कागज़
  • काले रंग का मार्कर/स्केच पेन
गतिविधि:
  • पीले रंग के चार्ट पेपर को आम के आकार में काटें।
  • माप के कागज़ को भी आम के आकार में काटें।
  • कटे हुए कागज़ को आम के आकार में कटे हुए चार्ट पेपर पर चिपकाएं।
  • हरे कागज़ को पत्तियों के आकार में काटें।
  • नोटपैड के ऊपर चिपकाएं।
तिरंगा सलाद



रंगबिरंगी सलाद के सेवन से हमारे रक्त में प्रतिउपचायक (एंटीआक्सीडेंट) शक्ति बढ़ने में मदद मिलती है।

सीखे गये मूल्य:
  • स्वस्थ रहने हेतु हम स्वयं के और उचित तरीके से खाने के प्रति उत्तरदायी रहें।
  • विभिन्न रंग हमारे अन्दर भावनाओं और गर्मजोशी को जगाते हैं।
  • नारंगी जैसे भड़कीले रंग हमारे मस्तिष्क को प्रेरित करते हैं।
  • पीला रंग सकारात्मकता लाता है।
  • अवलोकन करें और हमारे आसपास के बहुरूपदर्शनीय रंगों की सराहना करना सीखें।
  • बच्चे कटी हुई सब्जियों की प्रस्तुति पर काम कर सकते हैं।
  • फलों को छोटे टुकडों में काटने का कार्य गुरु द्वारा पहले किया जा सकता है।
आवश्यक सामग्री:
  • नारंगी, पीले और हरे रंग की सब्जियां।
  • सब्जियों की व्यवस्था हेतु एक तश्तरी (प्लेट)।
तैयार हो जाओ:

सलाद खाने के महत्व पर चर्चा करें। इस गतिविधि से सीखे गये मूल्यों के विषय में बात करें।

गतिविधि:

सब्जियों को मिलाएं और बच्चों को उन्हें छांटने के लिए कहें। यह एकाग्रता को बढ़ाने में मदद करता है।

स्वतंत्रता संग्राम और उनके आदर्श (खेल के रूप में)

15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है और यह एक राष्ट्रीय अवकाश है। यह वह दिन है जब भारत ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की थी। इस राष्ट्रीय त्यौहार की अवधि के दौरान, बालविकास गुरु बच्चों में देशभक्ति की भावना विकसित करने का अवसर ले सकते हैं। पाठ्यक्रम का सबसे अच्छा तरीका उन्हें हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में सिखाना है।

समूह 2 और समूह 3 बच्चों के लिए दो गतिविधियों को चित्रांकित किया गया है।

इनमें मूल्य निहित हैं:
  1. साहस, अहिंसा, प्रेम, स्वतंत्र सोच, दयालुता, ईमानदारी, विनम्रता, करुणा, प्रेरणा, सहानुभूति और दृढ़ संकल्प।
  2. बच्चों को हमारे देश के लिए स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किए गए महान बलिदानों के बारे में भी जानने को मिलता है।
  3. बच्चों में देशभक्ति की भावना का विकास होता है।
  4. एकाग्रता, याददाश्त में सुधार
आवश्यक सामग्री:
  • चार्ट पेपर
  • गोंद
  • स्वतंत्रता सेनानियों के फोटो

तैयार हो जाओ:
  1. गतिविधि की व्याख्या करने से पहले, गुरु निम्नलिखित पर चर्चा कर सकते हैं।
  2. बच्चों से "मूल्यों में निहित" प्रत्येक गुणवत्ता की व्याख्या करें। दैनिक जीवन में ऐसे उदाहरण/उपाख्यान दें जो इन गुणों को प्रदर्शित करते हैं।
  3. प्रत्येक स्वतंत्रता सेनानी के बारे में संक्षिप्त विवरण दें।
  4. स्वतंत्रता सेनानी से जुड़ी गुणवत्ता पर प्रकाश डालें। उदाहरण के लिए: गांधीजी के लिए, यह अहिंसा है।
  5. एक बार उपरोक्त चर्चा समाप्त हो जाने के बाद, बच्चे फ्लैश कार्ड तैयार करने में मदद कर सकते हैं। स्वतंत्रता सेनानियों के फोटो को काटकर चार्ट पेपर पर चिपका दिया जा सकता है और 10 फ्लैश कार्ड तैयार हो जाएंगे।
  6. इसमें लिखी गई गुणवत्ता के साथ छोटी पर्चियां बनाई जा सकती हैं। ऐसी दस पर्चियां बनाई जाएंगी।

गतिविधियों के लिए प्रारंभिक कार्य अब तैयार है।

खेल 1: स्वतंत्रता सेनानियों को नमन

टिप्पणी- गुरु एक कक्षा में उपरोक्त तैयारी एवं अगली कक्षा में गतिविधि करवा सकते हैं।

यह एक दिलचस्प खेल है जिसके लिए कुछ जगह की आवश्यकता होती है। बोध पत्रकों (फ्लेश कार्ड्स) को उनके बीच बहुत जगह के साथ फर्श पर फैलाया जा सकता है। जब संगीत चालू होता है, तो बच्चे घूमते हैं।

जब संगीत बंद हो जाता है, तो गुरु एक पर्ची निकालता है और एक गुणवत्ता पढ़ता है। जैसे: साहस। बच्चों को संबंधित फ्लैश कार्ड के पास खड़ा होना चाहिए। उदाहरण: नेताजी सुभाष चंद्र बोस। जो बच्चे सही फ़्लैश कार्ड के पास हैं, वे खेल में जारी रहेंगे। बाकी लोग खेल छोड़ देंगे।

फ़्लैश कार्ड और पहले से पढ़ी गई गुणवत्ता (फ्लैश कार्ड ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस’ और पर्ची ‘साहस’) को वापस ले लिया जाएगा। खेल शेष फ़्लैश कार्ड के साथ उसी तरह से जारी रहेगा जब तक 3 बच्चे अभी भी बाकी हैं। वे विजेता होंगे।

खेल 2: स्मरण शक्ति खेल (मेमोरी गेम)

बच्चों को फ्लैश कार्ड वितरित किए जाते हैं। बच्चे और गुरु एक गोल घेरे में बैठ सकते हैं। बच्चों को स्वतंत्रता सेनानी की गुणवत्ता के बारे में बताना होगा, जिसकी तस्वीर उन्हें दिए गए फ्लैश कार्ड पर मौजूद है। बच्चे बारी बारी से खेलेंगे और खेल दक्षिणावर्त शुरू हो सकता है।

यदि बच्चा सही गुणवत्ता कहने में असमर्थ है, तो कोई अन्य बच्चा यह कहने के लिए स्वेच्छा प्रगट कर सकता है। हालांकि, जो बच्चे जवाब देना चाहते हैं, उन्हें अपना हाथ बढ़ाना होगा। और गुरु तय करेगा कि कौन जवाब देगा। यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे शिष्टाचार को बनाए रखें।

गुरु का संदर्भ:
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस: साहस
  • सुभाष चंद्र बोस पूरी आजादी चाहते थे। उन्होंने जातिविहीन बाधाओं के बिना वर्गहीन समाज का सपना देखा। उनका नारा "जय हिंद" आज भी बहुत लोकप्रिय है। वह एक साहसी युवक था, जो आजादी पाने के लिए कुछ भी बलिदान करने के लिए तैयार था।

  • महात्मा गांधीजी: अहिंसा
  • गांधीजी ने अछूतों के लिए लड़ाई लड़ी। उन्होंने उन्हें "हरिजनों" का नाम दिया जिसका अर्थ है भगवान के लोग। वह अहिंसा के माध्यम से स्वतंत्रता की लड़ाई जीतना चाहते थे और हिंसा के किसी भी रूप के खिलाफ थे। वह अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं।

  • जवाहरलाल नेहरू: प्रेम
  • उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में गांधीजी का समर्थन किया। नेहरू बच्चों से प्यार करते थे और वे नेहरू को प्यार से "चाचा नेहरू" कहते थे। उनका जन्मदिन 14 नवंबर भारत में "बाल दिवस" ​​के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने बच्चों की शिक्षा, प्रगति और कल्याण के लिए काम किया।

  • सरदार भगत सिंह: स्वतंत्र सोच
  • 12 साल की उम्र में, उन्होंने जलियाँ वाला बाग हत्याकांड के स्थल का दौरा किया जहाँ निर्दोष लोग मारे गए थे। बहुत कम उम्र में वह स्वतंत्रता के संघर्ष से प्रभावित थे। वह नाट्यशास्त्र में बहुत अच्छे थे और एक अच्छे निबंध लेखक थे। वह सिर्फ एक संकल्प पर विश्वास करते थे, अपने देश के लिए आजादी पाने का। वह एक स्वतंत्र विचारक थे और अपने रास्ते पर चलते थे। उन्हें 23 साल की उम्र में फांसी दी गई थी।

  • डॉ राजेंद्र प्रसाद: करुणामय हृदय
  • वह एक छात्र थे जो हमेशा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होते थे और जिन्होने कई पदक जीते। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक (मास्टर डिग्री) और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट इन लॉ की उपाधि प्राप्त की। वह दयालु थे और सभी की देखभाल करते थे। उन्होंने इंडिगो के बागान के खिलाफ किसानों के आंदोलन का समर्थन किया। वह गांधी जी से बहुत प्रभावित थे। वह संकट में किसी की भी मदद करने के लिए हर समय तैयार रहते थे।

  • लाल बहादुर शास्त्री: ईमानदारी
  • वह स्वामी विवेकानंद, डॉ एनी बेसेंट और महात्मा गांधी के कार्यों से प्रेरित थे। वे एक बड़े दिल वाले व्यक्ति थे और जनता की बहुत सेवा करते थे। उन्होंने “जय जवान जय किसान” का एक शानदार नारा दिया। वह एक ईमानदार व्यक्ति थे और हमेशा सच बोलते थे।

  • कमला नेहरू: करूणा
  • उन्होंने स्वदेशी आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया और लोगों को विदेशी सामान जलाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने महिलाओं को संघर्ष में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। वह पंडित जवाहरलाल नेहरू की पत्नी थीं। वह एक दयालु महिला थी और उन्होने घायल स्वतंत्रता सेनानियों के इलाज के लिए अपने घर में एक दवाखाना शुरू किया।

  • कित्तूर रानी चेन्नम्मा: प्रेरणा
  • वह कर्नाटक की पूर्व रियासत कित्तूर की रानी थीं। वह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व करने के लिए बहुत प्रसिद्ध है। उन्होंने घुड़सवारी, तलवारबाजी और तीरंदाजी का प्रशिक्षण प्राप्त किया। वह भविष्य की पीढ़ी की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा थी और एक लोक नायक बन गईं।

  • सरोजिनी नायडू: सहानुभूति
  • वह एक उत्साही स्वतंत्रता कार्यकर्ता थीं। वह एक महान कवयित्री थीं जिन्होंने प्रकृति, देशभक्ति, प्रेम आदि पर कविताएँ लिखीं। उन्हे भारत का कोकिला कहा जाता था। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय, लंदन और कैम्ब्रिज में अध्ययन किया। उन्होंने महात्मा गांधीजी के साथ नमक सत्याग्रह में भाग लिया। वह बहुत सहानुभूतिपूर्ण थीं ।उन्होंने गरीबों के हित के साथ-साथ महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कड़ी मेहनत की।

  • झांसी की रानी लक्ष्मी बाई: दृढ़ संकल्प
  • वह उत्तर भारत में झांसी की रियासत की रानी थी। उनकी पढ़ाई में निशानेबाजी, घुड़सवारी, तलवारबाजी आदि शामिल थी। वह छोटी उम्र में भी एक स्वतंत्र लड़की थी। ब्रिटिश सेना उनके दृढ़ निश्चय और सैन्य कौशल के प्रति आशंकित रहते थे। उनके पास वेशभूषा की एक अनूठी शैली थी। उन्होंने साड़ी पहनी, फिर भी उनकी वेशभूषा एक पुरुष के समान रहती थी। उन्होंने अपनी तलवार के बिना अपना महल कभी नहीं छोड़ा।

ये किसकी आँखें हैं?
उत्तर
स्वतंत्रता दिवस - भूलभुलैय्या गतिविधि