साई-जन्मोत्सव-गतिविधियां

तुम मेरे सर्वस्व साई

सर्व धर्म नाम नृत्यमाला


सर्व धर्म नाम नृत्यमाला (बालविकास बच्चों द्वारा समूह नृत्य )

सर्व धर्म नाम नृत्य माला नामक नृत्य, आचार्य विनोबा भावे द्वारा लिखित सर्व धर्म प्रार्थना ‘ओम तत् सत्’ पर आधारित है, जो सभी धर्मों की एकता पर जोर देती है।

स्वामी ने कहा है कि सभी धर्मों के लिए सह-अस्तित्व और उत्कर्ष महत्वपूर्ण है। सभी धर्मों का सम्मान करना और सद्भाव में रहना शांति, एकता और समृद्धि की आधारभूत आवश्यकता है। बच्चों को इस प्रार्थना गीत का अर्थ एवं प्रार्थना में दिए गए भगवान के 36 नाम इस डांस वीडियो की मदद से सिखाए जा सकते हैं।

नृत्य के प्रभावशाली कलात्मक माध्यम से, हम प्रेम, शांति और एकता के सार्वभौमिक संदेश को समझने और फैलाने के लिए अपनी आंतरिक चेतना को प्रोत्साहित करें!

Keshadi Paadam Thozhuden


ज्ञान भूमियिले (बालविकास बच्चों द्वारा समूह नृत्य)


डांडालया डंडालया ( बालविकास बच्चों द्वारा समूह नृत्य )

लोका समस्था (बालविकास बच्चों द्वारा समूह नृत्य )


मानवीय मूल्यों की कुर्सियाँ


खिलाड़ी: प्रथम एवं द्वितीय समूह के बच्चे या माता-पिता

समग्रित मूल्य :
  • लोगों को जीवन में मूल्यों के महत्व से परिचित करना।
  • मूल्यों की कमी होने पर उत्पन्न होने वाली समस्याओं से लोगों को अवगत कराना।

आवश्यक सामग्री:
  • मार्कर, सेलो टेप
  • कागज / चार्ट पेपर
  • म्यूजिक प्लेयर

पूर्व योजना:
  • प्रत्येक कुर्सी के पीछे एक अलग अलग मूल्य-आधारित शब्द को सूचीबद्ध करने वाला एक पेपर संलग्न करें।

खेल :
  • यह खेल उसी तरह से खेला जाता है जैसे कि ‘संगीतमय कुर्सी दौड़’ (Musical Chair), परंतु यह खेल मानवीय मूल्यों की कुर्सियों के साथ खेला जाता है।
  • एक गोल घेरे में कुर्सियों की व्यवस्था करें। सुनिश्चित करें कि प्रतिभागियों की संख्या से कुर्सियों की संख्या हमेशा 1 कम हो।
  • जब संगीत शुरू होता है तो प्रतिभागी कुर्सियों के चारों ओर दौड़ते हैं।
  • जब संगीत बंद हो जाता है, तो प्रतिभागी एक खाली कुर्सी पर बैठते हैं।
  • अगले दौर के लिए 1 कुर्सी निकालें।
  • जिस प्रतिभागी को खेल से हटना होता है, (क्योंकि उसके बैठने के लिए खाली कुर्सी नहीं रहती है) उसे बताना होगा कि, निकाली हुई कुर्सी से जुड़े उस विशेष मूल्य का उसके लिए क्या मतलब है और उस मूल्य की अनुपस्थिति में उस पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
  • खेल में बचा हुआ अंतिम प्रतिभागी जीतता है।

यदि ज्ञान के सूत्र आपको प्रेरित करते हैं, तो उनका अभ्यास करें


खिलाड़ी:द्वितीय समूह, तृतीय समूह के बच्चे या अभिभावक।

समाहित मूल्य:

  • लोगों को मूल्यवान उद्धरण सीखने और उन्हें अभ्यास में लाने के लिए प्रेरित करना।
  • दूसरों को सुनने का अभ्यास करना।
  • याददाश्त बेहतर करना।

आवश्यक सामग्री:

  1. प्रेरणादायक उद्धरणों के कार्ड का एक सेट।
  2. प्रतिभागियों को आंखों पर पट्टी बांधने के लिए कपड़े के टुकड़े।

  3. पूर्व नियोजन:

    • गुरुओं को "प्रेरणात्मक उद्धरण" पर कार्ड का सेट बनाना चाहिए ।

    उदाहरण:
    • पहले बनो, फिर करो + फिर बताओ ।
    • ईश्वर कर्ता है + हम उपकरण हैं।
    • सदैव मदद करो + कभी चोट मत पहुंचाओ।
    • सबसे प्रेम करो + सबकी सेवा करो।
    • प्रेम देना + और क्षमा करना है।
    • मानव सेवा ही + माधव सेवा है ।
    • केवल एक ईश्वर है + और वह सर्वव्यापी है।
    • केवल एक ही धर्म है + प्रेम का धर्म।
    • केवल एक जाति है + मानवता की जाति।

    खेल:

    1. यह खेल एक बड़े क्षेत्र में बेहतर खेला जा सकता है।
    2. प्रतिभागियों को जगह के चारों ओर फैला दिया जाता है और मध्यस्थ (खेल का मार्गदर्शक) प्रत्येक को 1 उद्धरण (सुवाक्य) की आधी पर्ची देता है।
    3. प्रतिभागियों को उद्धरण याद करना होता है।
    4. वे खुद की आंखों पर पट्टी बांध लेते हैं, एवं गोल घेरे में चक्कर लगाते हैं।
    5. जैसे ही गुरु खेल शुरू करने का निर्देश देते हैं, प्रतिभागी धीमी और मीठी आवाज में अपने-अपने सुवाक्य बोलकर अपने जोड़ीदार को ढूँढते हैं ताकि सुवाक्य पूरा हो सके।
    6. बच्चे अपने हाथों को फैलाकर ले जा सकते हैं ताकि वे किसी से टकरायें ना।
    7. जैसे ही वे अपने साथी को ढूंढते हैं, उन्हें अपनी आंखों की पट्टी हटा देना चाहिए और गुरु के पास जाना चाहिए। गुरु सुवाक्य का मिलान करें।अगर कोई गलती है, तो बच्चे आंखों पर पट्टी बांधकर पुनः खेल में वापस जा सकते हैं।
    8. पहली जोड़ी जीतती है। लेकिन खेल तब तक खेला जाना चाहिए जब तक कि हर कोई अपने साथी को न पा ले।
    9. अंत में, प्रत्येक जोड़ी को प्रतिभागियों के सामने अपने सुवाक्यों का प्रस्तुतीकरण करना चाहिए।
    10. गुरु भी बच्चों को संदेश के रूप में इन सुवाक्यो को दैनिक जीवन में अभ्यास करने के लिए प्रेरित करें, न कि अंधभक्त।

आंतरिक बोधयुक्त शब्दकोष


खिलाड़ी :तृतीय समूह के बच्चे या माता-पिता

मूल्य संवर्द्धन:

  • कल्पना का विस्तार करने के लिए।
  • सुंदर शब्दों का उपयोग कर लोगों को प्रेरित करने के लिए।
  • बोध क्षमता बढ़ाने के लिए।

आवश्यक सामग्री:

  • एक शब्दकोष।
  • प्रति प्रतिभागी 1 कलम और 1 कागज।
  • समय दर्शिका (घड़ी)

पूर्व नियोजन:

  • गुरुओं को सकारात्मक शब्दों की सूची तैयार करनी चाहिए (हमेशा मूल्य-आधारित शब्दों, भावनाओं, अच्छे गुणों आदि का चयन करें)

उदाहरण:

  • शांति, एकता, आत्मा, आत्म, दिव्यता, सेवा

प्रतिभागियों को खेल को समझने के लिए गुरु को एक उदाहरण देना चाहिए:

  • आत्मा - ‘व्यक्ति का वह हिस्सा जो उनका शरीर नहीं है। शरीर के मरने के बाद भी यह बरकरार रहता है।

खेल:

  1. प्रतिभागियों को एक गोल घेरे में बैठना चाहिए।
  2. गुरु बताते हैं कि हर किसी के अंदर एक आंतरिक सुंदर शब्दकोश है और यह खेल उन शब्दों को अभ्यास में लाने के लिए याद दिलाएगा।
  3. तब वह प्रत्येक प्रतिभागी के कान में अलग-अलग "अमूर्त मूल्य-आधारित" शब्द (1 शब्द प्रति प्रतिभागी) को फुसफुसाते हैं।
  4. प्रतिभागियों को शब्दकोष में देखकर, उनको बताए गये शब्द से मिलते-जुलते शब्द का वर्णन पेपर पर करने के लिए 1 मिनट का समय दिया जाता है; किसी को भी शब्द बोलना नहीं चाहिए।
  5. समय समाप्त होने पर, गुरु प्रतिभागियों से उनका विवरण पढ़ने के लिए कहता है (कोई भी शब्द की घोषणा नहीं कर सकता है) बाकी प्रतिभागी को शब्द का अनुमान लगाना चाहिए।
  6. सही उत्तरों का पता लगाने वाले पहले व्यक्ति को 1 अंक मिलता है।
  7. सर्वाधिक अंक पाने वाले प्रतिभागी को विजेता घोषित किया जाता है।
  8. अंत में, गुरु शब्दकोश में लिए गये शब्दों की व्याख्या कर सकते हैं।

अच्छा देखो, अच्छा बनो, अच्छा करो (खेल)


खिलाड़ी:प्रथम समूह के बच्चे ।

समाहित मूल्य:

  1. विवेक जागृत करना ।
  2. एकाग्रता का विकास करना ।
  3. सतर्कता विकसित करना।
  4. अच्छे कर्मों का अनुकरण करने के लिए बच्चों को, अच्छा देखने, अच्छा सुनने, अच्छा करने और अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करना।

आवश्यक सामग्री:

  • अच्छे कार्य शब्दों और बुरे कार्य शब्दों की सूची।
  • मीरा कहती है…। मुस्कान (अच्छा)
  • मीरा कहती है…। कूदो (अच्छा)
  • मीरा कहती है…। बैठो (अच्छा)
  • मीरा कहती है…। खड़े हो (अच्छा)
  • मीरा कहती है…। गुस्सा हो जाओ (बुरा) नोट: न करने योग्य कार्यों के कहने पर बच्चों को बैठना चाहिए और अपनी आँखों को हाथों से ढंकना चाहिए। (अ) यानी और (ब) यानी बुरा
  • ताली (अ), अपना बांया हाथ ऊपर उठाओ (अ), नीचे रखो (अ), धक्का दो (ब)
  • नृत्य (अ), खाओ (अ), अपने दोस्त को लात मारो (ब)
  • दूध पियो (अ), नमस्ते करो (अ), चिल्लाओ (ब)
  • हंसो (अ), ईश्वर से प्रार्थना करो (अ), कठोर बनो (ब)
  • अपने पैरों को स्पर्श करो (अ), सीधे खड़े हो (अ)
  • अपने दोनों हाथों को ऊपर करो (अ), कूदो (अ), आलसी बनो (ब)
  • अपने बालों को कंघी करें (अ) अपने हाथ धोयें (अ), अपने दांतों को ब्रश करें (अ), गंदे कपड़े पहनें (ब)

पूर्व तैयारी:

  1. गुरु बच्चों को यह समझाएँ कि यह 'अच्छे कार्यों का अनुकरण' और 'बुरे कृत्यों का पालन नहीं करने का खेल है।'
  2. विवेक की आंतरिक भावना का उपयोग करके 'अच्छे को देखना, अच्छे कार्यों को करना और चरित्रवान बनना' के महत्व पर गुरु को जोर देना चाहिए। मूल रूप से धार्मिकता के मार्ग पर चलें।

खेल का क्रियान्वयन:

  • बच्चे अर्धवृत्त में या एक सीधी रेखा में खड़े होते हैं।
  • गुरु कहते हैं कि एक आज्ञा का पालन करो और बच्चों को उसके अनुसार कार्य करना होगा।
  • जब एक आदेश 'अच्छे काम' के बारे में हो, तो उन्हें यह प्रदर्शन करना चाहिए।
  • जब एक आदेश एक 'खराब कार्रवाई' के बारे में है, तो उन्हें इसका पालन नहीं करना चाहिए और तुरंत फर्श पर बैठना चाहिए, दोनों हाथों से आंखों को ढंकना चाहिए जब तक कि 'अच्छी कार्रवाई' का आदेश न दिया जाए।
  • खेल तब तक जारी रहता है जब तक केवल एक खिलाड़ी शेष न हो, जो विजेता हो।

नकारात्मक गुब्बारों को फोड़कर, सकारात्मक मूल्यों की वृद्धि करना


खिलाड़ी: द्वितीय समूह और तृतीय समूह के बच्चे

समाविष्ट मूल्य:

  • बच्चों को शांति, प्रेम, अहिंसा, सही आचरण और सच्चाई जैसे मानवीय मूल्य समझने में सहायता।
  • बुराई अथवा नकारात्मक विचारों एवं सकारात्मक विचारों में अंतर करने में विवेक का प्रयोग करना।
  • यह अनुभव कराना कि बुराई का गुब्बारा फटने अर्थात बुराई पर विजय प्राप्त करने से  खुशी स्वाभाविक रूप से प्राप्त होती है।

आवश्यक खेल सामग्री:

  • - प्रति बच्चे को 4 गुब्बारे और धागा (रंग ऐसा होना चाहिए कि गुरु गुब्बारे पर लिख सकें)
  • - 1 मार्कर
  • - संगीत प्लेयर (वैकल्पिक)

पूर्वगामी प्रयास:

  • गुरु द्वारा, बच्चों को जीवन में खुश रहने के लिए मानवीय मूल्यों के महत्व के बारे में बताया जाना चाहिए।
  • प्रस्तुत खेल उन्हें नकारात्मक एवं बुराई को समझने में अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा जिससे वे अपनी आंतरिक बुराइयों को समाप्त कर सकेंगे, इस बात को भी गुरु स्पष्ट करें।

खेल:

  • बच्चों को दो टीमों में विभाजित करें।
  • प्रत्येक बच्चे को मानवीय मूल्य (शांति, प्रेम, अहिंसा, सही आचरण या सत्य) और दुर्गुणों वाले (वासना, क्रोध, लालच, भ्रम, गर्व या ईर्ष्या) 4 गुब्बारे दिए जाते हैं। गुरु को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक टीम को मानवीय मूल्यों और दुर्गुणों वाले गुब्बारे समान मात्रा में दिये गये हैं।
  • प्रतिभागियों को अपने पैरों और बाहों में उन्हें बाँधने के लिए कहा जाता है। यदि उस समय तक कोई गुब्बारा फट जाता है, तो गुरु नया दे सकता है।
  • आपस में बात करने की अनुमति नहीं है।
  • जब संगीत शुरू होता है, तो प्रतिभागियों को गुब्बारों पर बैठकर उनकी टीम के दुर्गुणों वाले गुब्बारों को फोड़ने का आदेश दिया जाता है।
    • किसी को भी हाथों या शरीर के अन्य हिस्सों से गुब्बारे फोड़ने की अनुमति नहीं है।
    • किसी को भी अपने स्वयं के गुब्बारे फोड़ने की अनुमति नहीं है
    • बच्चे को मानवीय मूल्य वाले गुब्बारे को ध्यान से रखना चाहिए।
    • किसी को भी दूसरों के साथ बातचीत करने की अनुमति नहीं है ।
  • जैसे ही संगीत बंद हो जाता है, बच्चों को गुब्बारे फोड़ना बंद कर देना चाहिए। (संगीत बंद होने से पहले गुरु पर्याप्त समय दे सकते हैं)
  • गुरु दोनों टीमों की जाँच करेंगे।  हर मानवीय मूल्य वाले गुब्बारे के लिए एक अंक और दुर्गुणों वाले गुब्बारों के लिए एक अंक घटा दिया जायेगा।
  • अधिकतम अंक वाली टीम विजेता होगी!

खुशियों के गुब्बारे


खिलाड़ी:प्रथम एवं द्वितीय समूह के बच्चे

समाहित मूल्य:

  • बच्चों को अच्छे और बुरे व्यवहार के बीच अंतर करने में मदद करना।
  • बच्चों को यह समझने के लिए कि बुरे नजरिए को खत्म करने से खुशी मिलती है।

आवश्यक सामग्री:

  • प्रति बच्चे को 4 गुब्बारे और धागा (रंग ऐसा होना चाहिए कि मार्गदर्शक गुब्बारे पर लिख सकें)
  • 1-चिन्हक (मार्कर)
  • संगीत व्यवस्था (म्युज़िक प्लेयर)

पूर्व तैयारी:

  • गुरु द्वारा बच्चों को जीवन में खुश मिज़ाज़ मनोभाव के महत्व के विषय में बताया जाये।
  • समझाएँ कि यह खेल उन्हें अच्छी और बुरी बातों में अंतर करने के लिए विवेक का उपयोग करने में सहायक होगा और सभी बुरे दृष्टिकोणों को तोड़ने में मदद करेगा।

खेल:

  • बच्चों को दो टीमों में विभाजित करें।
  • गुरु द्वारा प्रत्येक बच्चे के पैर और कलाई पर चार गुब्बारे बाँधे जाएं।
  • बच्चों को अपनी आँखें बंद कर लेने के लिए कहें। अब गुरु उनके पास जाकर जल्दी से गुब्बारे पर मुस्कुराते हुए या उदास चेहरे के वैकल्पिक चित्र बनायें (प्रत्येक टीम में आधे गुब्बारे मुस्कुराते हुए और आधे गुब्बारे उदास चेहरे वाले होना चाहिए) 
  • अब बच्चे अब अपनी आँखें खोल सकते हैं। 
  • संगीत शुरू करें। अब प्रत्येक टीम को अपनी टीम के साथी के उदास चेहरे वाले गुब्बारे को, उस पर बैठकर फोड़ना है ।
    • किसी को भी हाथों या शरीर के अन्य हिस्सों से गुब्बारे फोड़ने की अनुमति नहीं है।
    • किसी को भी अपने स्वयं के गुब्बारे फोड़ने की अनुमति नहीं है।
    • बच्चे को मुस्कुराते हुए चेहरों के वाले गुब्बारों को साथ में रखना चाहिए।
  • उदास चेहरे वाले सभी गुब्बारों को खोने वाली पहली टीम को चिल्लाना चाहिए: “हैप्पी! हैप्पी! ”और संगीत थम जाए।
  • गुरु बचे हुए गुब्बारो की गिनती करें। प्रत्येक मुस्कुराते हुए चेहरे वाले गुब्बारा = + 1 अंक / प्रत्येक उदास चेहरा = -1 अंक!

सदैव प्रसन्न रहो (निरूपयोगी वस्तुओं से उपयोगिता की निर्मिती - गतिविधि)


क्या कभी आपने सोचा है कि हमें वास्तव में खुशी कैसे मिलती है?

खुशी, जो कि सकारात्मक और सुखद भावनाओं से भरी मन की स्थिति है, को कई तरीकों से महसूस किया जा सकता है। हमारे दैनिक जीवन में ऐसे अनेक स्त्रोत हैं जो हमारे मन को प्रसन्नता प्रदान करते हैं जैसे बारिश की महक, फूलों के खिलने का नजारा, सूर्यास्त का सुंदर दृश्य आदि । इसी प्रकार प्रकृति की तरह हम भी अपने नैसर्गिक गुणों के माध्यम से दूसरों को खुशी प्रदान कर सकते हैं – जैसे - मदद, प्यार, सहभागिता, दूसरों की देखभाल आदि।

स्वामी अक्सर कहते हैं, "हमेशा प्रसन्न रहो! प्रसन्न! प्रसन्न "। स्वामी के अनुसार, हमें प्रसन्न रहना चाहिए और दूसरों को प्रसन्न करना चाहिए। इससे भगवान प्रसन्न होंगे! इस दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए इससे सरल मंत्र और क्या हो सकता है!

यहां एक गतिविधि वीडियो है जो सर्वत्र खुशी का वातावरण निर्मित करेगा। यह वीडियो हमें दिखाता है कि फोम शीट और पुरानी सी डी से एक भित्ति-दोलन(वाल हैंगिंग) को कैसे बनाएं। स्माइली अर्थात स्मिति के साथ, बालविकास केंद्रों या घर पर लटका हुआ यह वाल हैंगिंग निश्चित रूप से प्रसन्नता पर दिए गए स्वामी के संदेश की निरंतर याद दिलाने में सफल होगा।