कृष्ण जन्माष्टमी - क्रियाएँ

कृष्ण का पालना
(आइसक्रीम तीलियों (स्टिक्स) के साथ एक शिल्प गतिविधि)

भागवत पुराण के अनुसार, कृष्ण का जन्म देवकी और वसुदेव के यहाँ हुआ था। देवकी के भाई कंस, जो मथुरा के राजा थे, से कृष्ण की रक्षा करने के लिए, वसुदेव बच्चे को यशोदा और नंद के घर गोकुल ले गए और यशोदा की बच्ची को लेकर मथुरा चले गए। बालकृष्ण, अपने पलने में घंटों आनंद मग्न रहते थे, अपने पालक मां यशोदा के प्यार में बेसुध जो उसे अत्यंत प्यार करतीं थीं।

यहाँ एक रमणीय शिल्प गतिविधि का दृश्य (वीडियो) है जो बच्चों और वयस्कों दोनों को समान रूप से रोमांचित करेगा। यह दिखाता है कि आइसक्रीम तीलियों (स्टिक्स) के साथ एक छोटा पालना कैसे बनाया जाए। छड़ी के अलावा, आप सभी को जरूरत है बुनियादी शिल्प सामग्री जैसे, गोंद, फेविकोल, कैंची, सजावट के लिए चमकीले सितारे आदि।

इस वर्ष, हमारे प्यारे कृष्ण के लिए एक सरल पालना बनाकर गोकुलाष्टमी के लिए तैयार हो जाओ। आप यशोदा और नंद के प्रतिरुप को पालने के बगल में रख सकते हैं और यहां तक ​​कि पालने के अंदर एक छोटी कृष्ण मूर्ति भी रख सकते हैं। यह विषयगत प्रस्तुति निश्चित रूप से आपके गोकुलाष्टमी समारोह को और आकर्षक बना देगी।

माखन की हांडी
(निरुपयोगी वस्तुओं से उत्कृष्टता का नवनिर्माण)


सीखे गए मूल्य:
  • कचरे से कला बनाना
  • पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्रयास करना

आवश्यक सामग्री:
  1. नारियल का गोला (आधा)
  2. सैंड पेपर
  3. रंगीन कागज या ऐक्रेलिक पेंट्स, तूलिका (ब्रश)
  4. कुंदन पत्थर, क्रम (सीक्वेंस)
  5. फ़ेविकोल या फेवीक्विक
  6. धागा या पतली रस्सी

भूमिका:

कृष्ण की बचपन की लीलाओं की कहानियों का वर्णन करते हैं, जहां उन्होंने मक्खन के बर्तन तोड़े और अपने ग्वाल मित्रों के साथ भाग गए। बच्चों को दही हांडी महोत्सव के बारे में भी समझाएं जो कि भारत के कुछ हिस्सों में, कृष्ण जन्माष्टमी के एक दिन बाद, हर साल मनाया जाता है। दही से भरे मिट्टी के मटकों को महान ऊंचाइयों पर लटका दिया जाता है। युवा पुरुष और लड़के एक मानव पिरामिड बनाते हैं और मटके तक पहुंचने और इसे तोड़ने का प्रयास करते हैं। यह एक सार्वजनिक क्रीड़ा है और इसके लिए पुरस्कार राशि भी है। यह भगवान कृष्ण के दिव्य चरित्र पर आधारित है, जहाँ मटकों से उनके माखन एवं दही की चोरी का वर्णन है।

गतिविधि :
  1. ताज़े नारियल को छीलकर,खरोंचने के बाद, बचे हुए खोल को लें ।
  2. इस अपशिष्ट (वेस्ट) पदार्थ से चिपके हुए तंतुओं को हटाने के लिए अच्छी तरह से साफ़ किया जा सकता है। इसे सैंड पेपर से पॉलिश करें।
  3. अब, नारियल के खोल को पेंट करें या उस पर एक रंगीन पेपर चिपका दें। अब दही की हांडी (जैसा कि चित्र में दिखाया गया है) के हैंडल को बनाने के लिए धागों को फ़ेविकोल या फेवीक्विक के साथ या वैकल्पिक रूप से सेलो टेप से चिपका सकते हैं।
  4. नारियल के खोल को कुंदन पत्थरों और अन्य तरीकों से सजाएं।
  5. आप खोल को कुछ रूई के गोलों से भर सकते हैं। यह बर्तन में मक्खन होने का प्रभाव देगा!
  6. कान्हा की माखन हांडी तैयार है।
कान्हा को सुसज्जित करना
मूल्य समाहित किए गये:
  1. भक्ति भाव
  2. एकाग्रता
  3. कलात्मक कल्पना का उपयोग
  4. टीम भावना (यदि समूह गतिविधि के रूप में की जाती है)
आवश्यक सामग्री:
  1. चार्ट पेपर / के जी कार्डबोर्ड
  2. रंगीन पेंसिल, क्रेयॉन, स्केच पेन आदि
  3. कुंदन सजावट (कृष्ण की तस्वीर को सजाने के लिए)
  4. गोंद छड़ी, कैंची आदि
विधि:
  1. तस्वीर को पुख्ता आधार देने के लिए कटी हुई शीट को कार्डबोर्ड या चार्ट पेपर से चिपका दिया जा सकता है।
  2. चमकीले रंग की पेंसिल या क्रेयॉन का उपयोग करते हुए, तस्वीर को अच्छी तरह से रंग दें। कृष्ण के आभूषण को रंग मत दो।
  3. हम आभूषणों को सजाने के लिए कुंदन का उपयोग कर सकते हैं।
  4. कार्डबोर्ड के एक टुकड़े का उपयोग करके, पीछे की तरफ एक छोटा सा आधार संलग्न किया जा सकता है। यह एक फ्रेम-इफेक्ट देगा।
  5. भगवान कृष्ण की सजी हुई तस्वीर को पूजा हॉल या किसी भी प्रमुख स्थान पर सभी को देखने और प्रशंसा करने के लिए रखा जा सकता है !!!!

भगवान श्री कृष्ण द्रौपदी की पादुका वहन करते हैं (चिन्नकथा)


[ऑडियो] श्रव्य यंत्र (स्वामी की अपनी आवाज में चिन्नकथा को सुनें)

यहाँ हमारे अपने प्रिय भगवान की दिव्य आवाज में महाभारत की एक कहानी का एक ऑडियो है।

भगवान कहते हैं कि हम अपने पैरों की सुरक्षा के लिए पादुका (सैंडल) पहनते हैं। कभी-कभी, इसी कारण से हम पादुकाओं (सैंडल) को हटा देते हैं और उन्हें अपने हाथ में पकड़ लेते हैं। भगवान ने इस अवधारणा को महाभारत में एक आश्चर्यजनक घटना से संबंधित किया,जहाँ द्रौपदी की रक्षा करने के लिए, कृष्ण ने उनकीे पादुकाओं को कपड़ों के एक टुकड़े में रखने में संकोच नहीं किया।

इस ऑडियो को सुनें और पता करें कि कृष्ण अपने भक्तों को मुसीबतों से बचाने के लिए क्या नही करते। पता चलता है कि कैसे द्रौपदी ने कृष्ण के चरणों में गिरकर अपने पतियों की जान बचाने हेतु मदद के लिए भीख मांगी। जानें कि भीष्म पितामह कैसे ठगे गए लेकिन गुस्सा होने के बजाय उन्हे राहत मिली! इस कहानी में, "द्रौपदी की पादुकाएँ"!

द्रौपदी की पादुका

सूर्यास्त हो गया था। यह महाभारत युद्ध का नौवां दिन था। भीष्म पितामह ने प्रतिज्ञा ली थी कि अगले दिन के अंत तक वह पांडवों को नष्ट कर देंगे। यह खबर सुनते ही द्रौपदी बिखर गई। एक सेकंड गंवाए बिना, वह मदद के लिए कृष्ण के पास दौड़ी। उसकी आँखों में आँसू थे। उसने कांपती आवाज में कृष्ण से पूछा, “आपने अब तक हमारी रक्षा की है, कृष्ण। क्या आप इस समय भी हमारी रक्षा नहीं करेंगे?" द्रौपदी और कृष्ण दोनों जानते थे कि भीष्म की बातें कभी गलत नहीं हो सकतीं। केवल उनके स्वयं के शब्दों में उनके द्वारा कही गई बातों को मिटाने की शक्ति थी। तब द्रौपदी कृष्ण के चरण कमलों में गिर गई।

कृष्ण ने द्रौपदी को समझाया कि कुछ चीजों को प्राप्त करने के लिए कुछ रणनीतियों को अपनाना पड़ता है। कुछ परिस्थितियों में, विचारधाराओं से परे सोचना चाहिए। एक व्यक्ति को कुछ कार्य करने के लिए तैयार होना चाहिए, भले ही वे बहुत अधिक समझ में न आए। कृष्ण की बात सुनकर द्रौपदी ने निर्देश की प्रतीक्षा की। तब कृष्ण ने उससे कहा कि उसे भीष्म के डेरे पर जाना चाहिए। उसने उसे उनके पैरों पर गिरने के लिए कहा और ऐसा करते समय, यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि भीष्म ने उसकी चूड़ियों की खनक सुन ली है। कृष्ण ने बताया कि वार्तालाप से बचने के लिए, द्रौपदी को आगे चलना चाहिए और कृष्ण उसका अनुसरण करेंगे। जब द्रौपदी ने चलना शुरू किया, तो उसके पादुकाओं ने खटखट की आवाजें कीं। कृष्ण जानते थे कि यह दूसरों को सचेत करेगा। इसलिए, उन्होंनेे बिना किसी हिचकिचाहट के द्रौपदी को अपने पादुकाएं हटाने और उसे उन्हें सौंपने के लिए कहा। कृष्ण ने उन्हें अपने अंग वस्त्रं (उनके कंधों पर लटका हुआ कपड़ा) में रखा। कृष्ण के पहले कहेे शब्दों को याद करते हुए, द्रौपदी ने कृष्ण से कोई सवाल नहीं किया और चुपचाप उन्हें अपने पादुकाएं सौंप दीं। तत्पश्चात वह भीष्म पितामह के तंबू की तरफ बढ़ीं।

इधर भीष्म अपने तंबू में बेचैनी से टहल रहे थे। वह पांडवों, जो सत्य स्वरूप या सत्य के अवतार थे, को मारने के लिए पहले की गई अपनी प्रतिज्ञा पर पछतावा कर रहे थे! उन्होंने अपना खाना नहीं खाया था और न ही उन्हें नींद आ रही थी। समस्या ग्रस्त मन के साथ कोई कैसे खा-पी अथवा सो सकता है?

द्रौपदी जल्दी से उनके तम्बू में घुस गई और बिना समय गंवाए, भीष्म के चरणों में गिर गई। भीष्म का मन कहीं और था और यह देखे बिना कि वह कौन था,उन्होंने बस द्रौपदी को आशीर्वाद देते हुए कहा, "दीर्घ सुमंगली भव!" जिसका अर्थ है "अखंड सौभाग्यवती भव"। द्रौपदी ने तुरंत खड़े होकर हाथ जोड़कर विनम्रता से कहा "पितामह मैं इसी आशीर्वाद की याचना करने आयी थी।"

तभी पितामह की नजर द्रौपदी पर पड़ी। वे अचानक चौंक गए परंतु दूसरे ही क्षण उन्हें प्रसन्नता भी हुई क्योंकि वे जानते थे कि उनका संकल्प पूरा होगा। ऐसी थी उनकी प्रतिज्ञा की शक्ति! अत:पांडवों को जीवन दान देने से वे अत्यंत प्रसन्न हुए क्योंकि वो जानते थे कि पांडव इसके अधिकारी थे।। पर वह यह भी जानने के लिए बहुत उत्सुक थे कि यह नीति किसकी थी क्योंकि वे जानते थे कि इसकी पृष्ठभूमि में कोई साधारण व्यक्ति नहीं होगा। कुछ ही समय में, कृष्ण ने भीष्म पितामह के तम्बू में प्रवेश किया। भीष्म ने कृष्ण की ओर प्यार से देखा और कहा, अच्छा, तो यह सब आपकी योजना है? मैं बहुत खुश हूँ एवं स्वयं को भारमुक्त महसूस कर रहा हूँ।अचानक उन्हें अपनी भूख का एहसास हुआ। एक व्यक्ति जो चिंतित अथवा दुखी हो उसे भूख नही लगती। पितामह को समझ में आ गया कि अब वह परेशानियों से मुक्त हो गये हैं। अचानक, उन्होंने देखा कि कृष्ण अपने हाथों में कुछ पकड़े हुए थे। उन्होंने पूछा। "कृष्ण, क्या मैं जान सकता हूं कि आप अपने हाथों में क्या पकड़े हुए हैं?" कृष्ण ने पादुकाओं को नीचे रखा और बिना किसी हिचकिचाहट के उत्तर दिया, "द्रौपदी की पादुका"। भीष्म इतने भावुक हो गए कि उन्होंने प्रचुर आंसू बहाने शुरू कर दिए। उन्होंने कहा, “अपने भक्तों की सुरक्षा के लिए आप क्या असाधारण परेशानी उठाते हैं, ओह! कृष्ण! अगर आप अपने भक्तों की रक्षा करने की बात करते हैं तो यह विचार भी आपके मन में नहीं आता कि यह आपके द्वारा किया जाने वाला कार्य उचित है अथवा नहीं! ” कृष्ण मुस्कुराए। हाँ, वह अपने भक्तों की देखभाल करने के लिए कोई भी सीमा पार कर सकते हैं।

कृष्णा जी के रेखा-चित्रोँ में रंग भरिये
कृष्णा जी के चरण - चिन्ह (वीडियो )

श्री कृष्ण हेतु प्रेम रूपी पुष्पहार

(ताजे फूलोँ से क्रमश: पुष्पहार बनाने की प्रक्रिया का उल्लेख )
राधा और कृष्ण (भूल भुलैय्या गतिविधि )
कृष्ण मंडपम
(व्यर्थ चीजों से उत्तम चीज बनाना)
समाहित मूल्य:
  • व्यर्थ चीजों को कलात्मकता प्रदान करना
  • पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्रयास
आवश्यक सामग्री:
  1. पुरानी खाली माचिस की डब्बी
  2. अपशिष्ट (निरूपयोगी) पतली शीट / कार्ड बोर्ड
  3. अपशिष्ट चॉकलेट रैपर्स / कलर पेपर
  4. गोंद
  5. कैंची
  6. सजावटी सामग्री (स्टिकर, रंग पत्थर, चमक आदि)
गतिविधि:
  • चरण 1 :एक खाली माचिस की डब्बी लें।



  • चरण 2 :चित्र में दिखाए अनुसार इसे व्यवस्थित करें।



  • चरण 3 :पतली शीट / कार्ड बोर्ड लें और इसे एक त्रिकोण टुकड़े के रूप में काट लें।



  • चरण 4 : चित्र में दिखाए अनुसार नीचे के भाग को मोड़ें।



  • चरण 5 :त्रिकोण के निचले भाग को माचिस से चिपकाएँ।



  • चरण 6 : चॉकलेट रैपर्स / कलर पेपर का उपयोग करके, माचिस की सतह और त्रिकोण को कवर करें।



  • चरण 7 :मंडपम (स्टेज) सजाएँ



  • चरण 8 : मंडपम के अंदर कृष्ण की एक छोटी मूर्ति रखें।
  • चरण 9 : मंडपम के अंदर कृष्ण की एक छोटी मूर्ति रखें।

  • टी आर रंजनी द्वारा(बाल विकास छात्रा)