गणेश चतुर्थी गतिविधियाँ

कृष्ण का पालना
(आइसक्रीम तीलियों (स्टिक्स) के साथ एक शिल्प गतिविधि)

भागवत पुराण के अनुसार, कृष्ण का जन्म देवकी और वसुदेव के यहाँ हुआ था। देवकी के भाई कंस, जो मथुरा के राजा थे, से कृष्ण की रक्षा करने के लिए, वसुदेव बच्चे को यशोदा और नंद के घर गोकुल ले गए और यशोदा की बच्ची को लेकर मथुरा चले गए। बालकृष्ण, अपने पलने में घंटों आनंद मग्न रहते थे, अपने पालक मां यशोदा के प्यार में बेसुध जो उसे अत्यंत प्यार करतीं थीं।

यहाँ एक रमणीय शिल्प गतिविधि का दृश्य (वीडियो) है जो बच्चों और वयस्कों दोनों को समान रूप से रोमांचित करेगा। यह दिखाता है कि आइसक्रीम तीलियों (स्टिक्स) के साथ एक छोटा पालना कैसे बनाया जाए। छड़ी के अलावा, आप सभी को जरूरत है बुनियादी शिल्प सामग्री जैसे, गोंद, फेविकोल, कैंची, सजावट के लिए चमकीले सितारे आदि।

इस वर्ष, हमारे प्यारे कृष्ण के लिए एक सरल पालना बनाकर गोकुलाष्टमी के लिए तैयार हो जाओ। आप यशोदा और नंद के प्रतिरुप को पालने के बगल में रख सकते हैं और यहां तक ​​कि पालने के अंदर एक छोटी कृष्ण मूर्ति भी रख सकते हैं। यह विषयगत प्रस्तुति निश्चित रूप से आपके गोकुलाष्टमी समारोह को और आकर्षक बना देगी।

माखन की हांडी
(निरुपयोगी वस्तुओं से उत्कृष्टता का नवनिर्माण)


सीखे गए मूल्य:
  • कचरे से कला बनाना
  • पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्रयास करना

आवश्यक सामग्री:
  1. नारियल का गोला (आधा)
  2. सैंड पेपर
  3. रंगीन कागज या ऐक्रेलिक पेंट्स, तूलिका (ब्रश)
  4. कुंदन पत्थर, क्रम (सीक्वेंस)
  5. फ़ेविकोल या फेवीक्विक
  6. धागा या पतली रस्सी

भूमिका:

कृष्ण की बचपन की लीलाओं की कहानियों का वर्णन करते हैं, जहां उन्होंने मक्खन के बर्तन तोड़े और अपने ग्वाल मित्रों के साथ भाग गए। बच्चों को दही हांडी महोत्सव के बारे में भी समझाएं जो कि भारत के कुछ हिस्सों में, कृष्ण जन्माष्टमी के एक दिन बाद, हर साल मनाया जाता है। दही से भरे मिट्टी के मटकों को महान ऊंचाइयों पर लटका दिया जाता है। युवा पुरुष और लड़के एक मानव पिरामिड बनाते हैं और मटके तक पहुंचने और इसे तोड़ने का प्रयास करते हैं। यह एक सार्वजनिक क्रीड़ा है और इसके लिए पुरस्कार राशि भी है। यह भगवान कृष्ण के दिव्य चरित्र पर आधारित है, जहाँ मटकों से उनके माखन एवं दही की चोरी का वर्णन है।

गतिविधि :
  1. ताज़े नारियल को छीलकर,खरोंचने के बाद, बचे हुए खोल को लें ।
  2. इस अपशिष्ट (वेस्ट) पदार्थ से चिपके हुए तंतुओं को हटाने के लिए अच्छी तरह से साफ़ किया जा सकता है। इसे सैंड पेपर से पॉलिश करें।
  3. अब, नारियल के खोल को पेंट करें या उस पर एक रंगीन पेपर चिपका दें। अब दही की हांडी (जैसा कि चित्र में दिखाया गया है) के हैंडल को बनाने के लिए धागों को फ़ेविकोल या फेवीक्विक के साथ या वैकल्पिक रूप से सेलो टेप से चिपका सकते हैं।
  4. नारियल के खोल को कुंदन पत्थरों और अन्य तरीकों से सजाएं।
  5. आप खोल को कुछ रूई के गोलों से भर सकते हैं। यह बर्तन में मक्खन होने का प्रभाव देगा!
  6. कान्हा की माखन हांडी तैयार है।
कान्हा को सुसज्जित करना
मूल्य समाहित किए गये:
  1. भक्ति भाव
  2. एकाग्रता
  3. कलात्मक कल्पना का उपयोग
  4. टीम भावना (यदि समूह गतिविधि के रूप में की जाती है)
आवश्यक सामग्री:
  1. चार्ट पेपर / के जी कार्डबोर्ड
  2. रंगीन पेंसिल, क्रेयॉन, स्केच पेन आदि
  3. कुंदन सजावट (कृष्ण की तस्वीर को सजाने के लिए)
  4. गोंद छड़ी, कैंची आदि
विधि:
  1. तस्वीर को पुख्ता आधार देने के लिए कटी हुई शीट को कार्डबोर्ड या चार्ट पेपर से चिपका दिया जा सकता है।
  2. चमकीले रंग की पेंसिल या क्रेयॉन का उपयोग करते हुए, तस्वीर को अच्छी तरह से रंग दें। कृष्ण के आभूषण को रंग मत दो।
  3. हम आभूषणों को सजाने के लिए कुंदन का उपयोग कर सकते हैं।
  4. कार्डबोर्ड के एक टुकड़े का उपयोग करके, पीछे की तरफ एक छोटा सा आधार संलग्न किया जा सकता है। यह एक फ्रेम-इफेक्ट देगा।
  5. भगवान कृष्ण की सजी हुई तस्वीर को पूजा हॉल या किसी भी प्रमुख स्थान पर सभी को देखने और प्रशंसा करने के लिए रखा जा सकता है !!!!

भगवान श्री कृष्ण द्रौपदी की पादुका वहन करते हैं (चिन्नकथा)


[ऑडियो] श्रव्य यंत्र (स्वामी की अपनी आवाज में चिन्नकथा को सुनें)

यहाँ हमारे अपने प्रिय भगवान की दिव्य आवाज में महाभारत की एक कहानी का एक ऑडियो है।

भगवान कहते हैं कि हम अपने पैरों की सुरक्षा के लिए पादुका (सैंडल) पहनते हैं। कभी-कभी, इसी कारण से हम पादुकाओं (सैंडल) को हटा देते हैं और उन्हें अपने हाथ में पकड़ लेते हैं। भगवान ने इस अवधारणा को महाभारत में एक आश्चर्यजनक घटना से संबंधित किया,जहाँ द्रौपदी की रक्षा करने के लिए, कृष्ण ने उनकीे पादुकाओं को कपड़ों के एक टुकड़े में रखने में संकोच नहीं किया।

इस ऑडियो को सुनें और पता करें कि कृष्ण अपने भक्तों को मुसीबतों से बचाने के लिए क्या नही करते। पता चलता है कि कैसे द्रौपदी ने कृष्ण के चरणों में गिरकर अपने पतियों की जान बचाने हेतु मदद के लिए भीख मांगी। जानें कि भीष्म पितामह कैसे ठगे गए लेकिन गुस्सा होने के बजाय उन्हे राहत मिली! इस कहानी में, "द्रौपदी की पादुकाएँ"!

द्रौपदी की पादुका

सूर्यास्त हो गया था। यह महाभारत युद्ध का नौवां दिन था। भीष्म पितामह ने प्रतिज्ञा ली थी कि अगले दिन के अंत तक वह पांडवों को नष्ट कर देंगे। यह खबर सुनते ही द्रौपदी बिखर गई। एक सेकंड गंवाए बिना, वह मदद के लिए कृष्ण के पास दौड़ी। उसकी आँखों में आँसू थे। उसने कांपती आवाज में कृष्ण से पूछा, “आपने अब तक हमारी रक्षा की है, कृष्ण। क्या आप इस समय भी हमारी रक्षा नहीं करेंगे?" द्रौपदी और कृष्ण दोनों जानते थे कि भीष्म की बातें कभी गलत नहीं हो सकतीं। केवल उनके स्वयं के शब्दों में उनके द्वारा कही गई बातों को मिटाने की शक्ति थी। तब द्रौपदी कृष्ण के चरण कमलों में गिर गई।

कृष्ण ने द्रौपदी को समझाया कि कुछ चीजों को प्राप्त करने के लिए कुछ रणनीतियों को अपनाना पड़ता है। कुछ परिस्थितियों में, विचारधाराओं से परे सोचना चाहिए। एक व्यक्ति को कुछ कार्य करने के लिए तैयार होना चाहिए, भले ही वे बहुत अधिक समझ में न आए। कृष्ण की बात सुनकर द्रौपदी ने निर्देश की प्रतीक्षा की। तब कृष्ण ने उससे कहा कि उसे भीष्म के डेरे पर जाना चाहिए। उसने उसे उनके पैरों पर गिरने के लिए कहा और ऐसा करते समय, यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि भीष्म ने उसकी चूड़ियों की खनक सुन ली है। कृष्ण ने बताया कि वार्तालाप से बचने के लिए, द्रौपदी को आगे चलना चाहिए और कृष्ण उसका अनुसरण करेंगे। जब द्रौपदी ने चलना शुरू किया, तो उसके पादुकाओं ने खटखट की आवाजें कीं। कृष्ण जानते थे कि यह दूसरों को सचेत करेगा। इसलिए, उन्होंनेे बिना किसी हिचकिचाहट के द्रौपदी को अपने पादुकाएं हटाने और उसे उन्हें सौंपने के लिए कहा। कृष्ण ने उन्हें अपने अंग वस्त्रं (उनके कंधों पर लटका हुआ कपड़ा) में रखा। कृष्ण के पहले कहेे शब्दों को याद करते हुए, द्रौपदी ने कृष्ण से कोई सवाल नहीं किया और चुपचाप उन्हें अपने पादुकाएं सौंप दीं। तत्पश्चात वह भीष्म पितामह के तंबू की तरफ बढ़ीं।

इधर भीष्म अपने तंबू में बेचैनी से टहल रहे थे। वह पांडवों, जो सत्य स्वरूप या सत्य के अवतार थे, को मारने के लिए पहले की गई अपनी प्रतिज्ञा पर पछतावा कर रहे थे! उन्होंने अपना खाना नहीं खाया था और न ही उन्हें नींद आ रही थी। समस्या ग्रस्त मन के साथ कोई कैसे खा-पी अथवा सो सकता है?

द्रौपदी जल्दी से उनके तम्बू में घुस गई और बिना समय गंवाए, भीष्म के चरणों में गिर गई। भीष्म का मन कहीं और था और यह देखे बिना कि वह कौन था,उन्होंने बस द्रौपदी को आशीर्वाद देते हुए कहा, "दीर्घ सुमंगली भव!" जिसका अर्थ है "अखंड सौभाग्यवती भव"। द्रौपदी ने तुरंत खड़े होकर हाथ जोड़कर विनम्रता से कहा "पितामह मैं इसी आशीर्वाद की याचना करने आयी थी।"

तभी पितामह की नजर द्रौपदी पर पड़ी। वे अचानक चौंक गए परंतु दूसरे ही क्षण उन्हें प्रसन्नता भी हुई क्योंकि वे जानते थे कि उनका संकल्प पूरा होगा। ऐसी थी उनकी प्रतिज्ञा की शक्ति! अत:पांडवों को जीवन दान देने से वे अत्यंत प्रसन्न हुए क्योंकि वो जानते थे कि पांडव इसके अधिकारी थे।। पर वह यह भी जानने के लिए बहुत उत्सुक थे कि यह नीति किसकी थी क्योंकि वे जानते थे कि इसकी पृष्ठभूमि में कोई साधारण व्यक्ति नहीं होगा। कुछ ही समय में, कृष्ण ने भीष्म पितामह के तम्बू में प्रवेश किया। भीष्म ने कृष्ण की ओर प्यार से देखा और कहा, अच्छा, तो यह सब आपकी योजना है? मैं बहुत खुश हूँ एवं स्वयं को भारमुक्त महसूस कर रहा हूँ।अचानक उन्हें अपनी भूख का एहसास हुआ। एक व्यक्ति जो चिंतित अथवा दुखी हो उसे भूख नही लगती। पितामह को समझ में आ गया कि अब वह परेशानियों से मुक्त हो गये हैं। अचानक, उन्होंने देखा कि कृष्ण अपने हाथों में कुछ पकड़े हुए थे। उन्होंने पूछा। "कृष्ण, क्या मैं जान सकता हूं कि आप अपने हाथों में क्या पकड़े हुए हैं?" कृष्ण ने पादुकाओं को नीचे रखा और बिना किसी हिचकिचाहट के उत्तर दिया, "द्रौपदी की पादुका"। भीष्म इतने भावुक हो गए कि उन्होंने प्रचुर आंसू बहाने शुरू कर दिए। उन्होंने कहा, “अपने भक्तों की सुरक्षा के लिए आप क्या असाधारण परेशानी उठाते हैं, ओह! कृष्ण! अगर आप अपने भक्तों की रक्षा करने की बात करते हैं तो यह विचार भी आपके मन में नहीं आता कि यह आपके द्वारा किया जाने वाला कार्य उचित है अथवा नहीं! ” कृष्ण मुस्कुराए। हाँ, वह अपने भक्तों की देखभाल करने के लिए कोई भी सीमा पार कर सकते हैं।

श्री गणेश का चित्रांकन - अंकों के रूप में

गणेश चतुर्थी, भगवान शिव और पार्वती के पुत्र भगवान गणेश का जन्मदिन मनाने के लिए दस दिवसीय हिंदू त्यौहार है। वह बाधाओं का निवारण करने वाला होता है और जो हमारे जीवन में शुभता का उदय करता है। कुछ परिवार अपने घरों में गणेश की मिट्टी की मूर्ति रखते हैं जबकि कुछ मूर्ति को सार्वजनिक पंडालों में रखते हैं। विशेष मिठाइयाँ, जैसे लड्डू, मोदक, करंजियाँ आदि प्रसाद के रूप में वितरित करने के लिए तैयार किए जाते हैं।

मूर्ति का विसर्जन उत्सव के 10 वें दिन जलस्रोतों में किया जाता है। पर्यावरण के अनुकूल कारणों से, लोगों को गणेश की मिट्टी की मूर्तियों को खरीदने या बनाने की सलाह दी जाती है। यह त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है और कभी-कभी सांस्कृतिक कार्यक्रम, इस त्यौहार का एक अंग बन जातें हैं।

भगवान गणेश की छवि अद्वितीय है क्योंकि वे एकमात्र भगवान हैं जिनके पास गज मस्तक है। कागज या कैनवास पर गणेश की छवि को साकार करना हर कलाकार को खुशी प्रदान करता है। कुछ इसे विस्तार से करते हैं जबकि कुछ कुछ आविष्कारशील स्ट्रोक के साथ। यहां एक वीडियो है जो दिखाता है कि संख्याओं का उपयोग करके गणेश की छवि को कैसे चित्रित किया जाता है।

इस गणेश चतुर्थी उत्सव के दौरान, अपनी सोच को रचनात्मकता की ओर जाने दें और समृद्धि और ज्ञान के लिए भगवान गणेश की तस्वीर पर ध्यान केंद्रित करें।

कृष्णा जी के चरण - चिन्ह (वीडियो )


बिस्कुट गणेश

इस गतिविधि में निम्नलिखित मूल्य समाहित किए गए हैं:
  • गणेश चतुर्थी मनाने और अन्य लोगों के साथ खुशी साझा करने का महत्व
  • नारायण सेवा का महत्व
  • रचनात्मकता, संगठित क्रियात्मकता
तैयार हो जाओ:

गणेश चतुर्थी के महत्व को गुरु समझा सकते हैं
गुरू गणेश पर एक श्लोक या भजन भी सिखा सकते हैं या एक कहानी भी बता सकते हैं।

आवश्यक सामग्री:
  • बिस्कुट, चॉकलेट
गतिविधि:
  1. कक्षा में छात्रों को औसत संख्या के आधार पर समूहों में विभाजित किया जाना चाहिए और समूहों को नाम दिए जा सकते हैं।
  2. गुरु समूह में प्रत्येक छात्र को विभिन्न प्रकार के बिस्कुट और चॉकलेट दे सकते हैं (छात्रों को बिस्कुट लाने के लिए भी कहा जा सकता है)
  3. बच्चों को भगवान गणेश की अलग-अलग तस्वीरें दिखाएं और उन्हें दिए गए बिस्कुट के साथ गणेश की छवि बनाने के लिए कहें।
    (सब समूह एक गणेश की प्रतिमा बनाने के लिए एक साथ जुड़ सकते हैं या प्रत्येक समूह अपनी सामर्थ्य के अनुसार के बना सकते हैं)
  4. प्रत्येक छात्र गणेश जी का पूजन कर सकते हैं जो उन्होंने बनाये हैं।
    (छात्र नैवेद्य के रूप में भगवान के सामने भजन भी गा सकते हैं)
  5. अंतिम भाग में भगवान की मूर्ति का विसर्जन आता है।
    विसर्जन के समय बच्चों के बीच बिस्कुट और चॉकलेट बांटना और यदि संभव हो तो गरीबों को वितरित कर सकते हैं।
राधा और कृष्ण (भूल भुलैय्या गतिविधि )

सब्जियों से निर्मित गणेश प्रतिमा

समाहित मूल्य:
  • गणेश चतुर्थी मनाने और अन्य लोगों के साथ खुशी साझा करने का महत्व
  • नारायण सेवा का महत्व
  • रचनात्मकता
तैयार हो जाओ:

गुरु बच्चों को नारायण सेवा की व्याख्या कर सकते हैं तथा इस गतिविधि में सब्जियों का उपयोग कैसे करें इसका मार्गदर्शन कर सकते हैं।
बच्चों को गणेश पर श्लोक, भजन या कहानी सिखाई जा सकती है।

आवश्यक सामग्री:
  • सब्जियां जैसे कद्दू, लौकी, बैंगन, ककड़ी, गोभी, आलू, आदि।
  • टूथ पिक्स (दंत खोदनी)
गतिविधि:
  1. कक्षा में छात्रों को समूह की संख्या के अनुसार समूहों में विभाजित किया जाना चाहिए और समूहों को नाम देना चाहिए।
  2. गुरु समूह में प्रत्येक छात्र को विभिन्न प्रकार की सब्जियां दे सकते हैं (छात्रों को घर से सब्जियां लाने के लिए भी कहा जा सकता है।)
  3. एक बार वितरण समाप्त हो जाने के बाद, उन सभी को दी गई सभी सब्जियों का अवलोकन करने दें।
  4. बच्चों को भगवान गणेश के अलग-अलग चित्र दिखाएं और उन्हें समझाएं कि वे दी गई सब्जियों से गणेश की आकृति बनाने वाले हैं।
    (सब समूह गणेश की प्रतिमा बनाने के लिए एक साथ जुड़ सकते हैं या प्रत्येक समूह सामर्थ्यानुसार बना सकते हैं।)
  5. छात्रों को अपने द्वारा बनाए गए गणेश की पूजा अपने तरीके से करने के लिए कहा जा सकता है (छात्र नैवेद्य के रूप में भगवान के सामने भजन भी गा सकते हैं)
  6. अंतिम भाग मे भगवान की मूर्ति का विसर्जन आता है। यहाँ हमारे मामले में विसर्जन के लिए सब्जियों को मूर्ति से इकट्ठा किया जा सकता है और इसका उपयोग नारायण सेवा (गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को भोजन का वितरण) के लिए किया जा सकता है।
घर पर पर्यावरण के अनुकूल (इको फ्रेंडली) गणपति प्रतिमा का निर्माण करना

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मदिन का त्यौहार है। भगवान गणेश की मूर्तियों को घरों या सार्वजनिक स्थानों पर अधिकतम 10 दिनों या उससे कम समय के लिए रखा जाता है और फिर मूर्ति को एक जल स्त्रोत में विसर्जित कर दिया जाता है। इसे विसर्जन के नाम से जाना जाता है। आज, लोगों ने महसूस किया है कि धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ हमारे पर्यावरण को बचाने और संरक्षित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। परंपरागत रूप से, गणेश की मूर्तियों को प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनाया जाता है, जिन्हें ग्लिटर (चमकीली वस्तुओं) से चित्रित और सजाया जाता है। जब ये जल निकायों में डूब जाते हैं तो वे पानी को प्रदूषित करते हैं।

मिट्टी या कागज़ की लुगदी से बनी गणेश मूर्तियाँ पर्यावरण के लिए एक बेहतर सोच है। यह सुनिश्चित करता है कि हमारे जल निकाय बच गए हैं। हमारा स्वास्थ्य भी सुरक्षित है और यह जलीय जानवरों और पौधों को पानी में पनपना जारी रखने की अनुमति देता है।

अच्छी खबर यह है कि हम अपने घरों में ही मिट्टी से गणेश की मूर्तियाँ बना सकते हैं और अगर आप यह जानना चाहते हैं कि इसको आसानी से कैसे बनाया जाए, तो हमारे पास यहां एक वीडियो है जो मदद करेगा। यह कदम दर कदम बताता हैै कि कैसे अपने घर में सिर्फ मिट्टी के साथ एक स्थायी गणेश की मूर्ति बना सकते हैं।

क्या आप जानते हैं?
छतरी गणेश'

मिलेजुले धान्य का गणेश

(हस्तकला की गतिविधि)

गतिविधि में निहित मूल्य:
  • धीरज
  • रचनात्मकता
आवश्यक सामग्री:
  • गणेश टेम्पलेट (नमूना)
  • गोंद / फेविकोल
  • ब्रश
  • फिंगर मिलेट (रागी), गेहूं, कुलथी, मूँग, राजमा, काला चना, काबुली चना और चावल
  • पेंसिल
  • रबड़
  • ए4 शीट / चार्ट पेपर (कागज़)
गतिविधि:
  1. गणेश की रूपरेखा तैयार करें या नीचे दिए गए गणेश टेम्पलेट का प्रिंटआउट लें।
  2. चेहरे और सूंड पर ब्रश का उपयोग करके, गोंद लगायें, उस पर गेहूं फैलायें और इसे छड़ी के साथ कसकर पैक करें। चरण 2 का अनुसरण करें और नीचे लिखे अनुदेश के अनुसार गणेश के विभिन्न अंगों को भरें;
    • पेट के लिए कुलथी
    • कानों के लिए मूँग
    • पैरों के लिए रागी
    • हाथ / पैरों के लिए गेहूं और रूपरेखा के लिए रागी
    • काबुली चना और काले चने के साथ मुकुट
    • चावल और राजमा के साथ आँखें
    • विभूति की पट्टियाँ (माथे पर तीन क्षैतिज रेखाएं) काले चने के साथ ।
  3. दो दिनों के लिए सूखने दें।
  4. यदि कोई खाली जगह छूट गयी हो तो उसे भरें।
  5. ब्रश के साथ अनाज पर ट्रांसपेरेंट गोंद लगाएं और इसे दो दिनों के लिए सूखने के लिए छोड़ दें। यह कीड़ों से शिल्प को रोकने के लिए है।
  6. शिल्प को फ्रेम करें और दीवार पर लटकाएं।

भित्ति-दोलन (वॉल हैंगिंग) विनायक

हम एक दीवार पर टांगने वाले श्री गणेश के सजीव चित्रण को प्रस्तुत करते हुए बहुत प्रसन्न हैं! इस शिल्प में बहुत बुनियादी शिल्प सामग्री की आवश्यकता होती है। यह कम समय लेने वाला भी है क्योंकि इसे दिए गए गणेश के आकार पट्ट (टेम्पलेट) से किए गए कटआउट की मदद से किया जा सकता है। तो एक चार्ट पेपर पकड़ो और शुरू करने के लिए तैयार हो जाओ!

समग्रित मूल्य:
  • रचनात्मकता
  • धीरज
आवश्यक सामग्री:
  • गणेश टेम्प्लेट( आकृति)
  • चॉक (खड़िया)
  • काला / लाल / केसरिया कार्ड बोर्ड (एक मोटा चार्ट पेपर)
  • समाचार पत्र
  • शिल्प गोंद / फ़ेविकोल
  • डोरी
गतिविधि:
  • गणेशजी की रूपरेखा तैयार करें या नीचे दिए गए गणेश टेम्पलेट का प्रिंटआउट लें।
  • एक चमकीले रंग का चार्ट पेपर लें।
  • यदि आप चित्र को ट्रेस करना चाहते हैं, तो दिखाए गए आकार पट्ट से आकृति काटें।
  • कट आउट की सहायता से गणेशजी की आकृति को चार्ट पेपर पर ट्रेस करें।
  • अखबारों के पतले रोल बनाएं और छड़ी जैसी आकृति बनाने के लिए उन्हें एक साथ चिपकाएं ।
    गणेशजी के चित्र के चारों तरफ इसका उपयोग एक फ्रेम प्रभाव देने के लिए करें।
  • चार्ट के शीर्ष पर केंद्र में छेद करें और डोरी को उसमें डालें।
  • सजाने के लिए अनुक्रम(सीक्वेंस) या चमक का उपयोग करें।
  • गणेश की कुछ विशेषताओं को विशिष्ट रूप से दर्शाएं। आपकी गणेश वॉल हैंगिंग अब तैयार है!