महाशिवरात्रि - गतिविधियाँ

शिवलिंग
(बिंदुओं को आपस में जोड़कर शिवलिंग में रंग भरें।)

- Sketch by Ms.Hema Satagopan

सोचो और रंग भरो
(शिव से संबंधित चित्रों में रंग भरो)

शब्द पकड़ो-भजन गाओ
(खेल)



प्रभु की महिमा का गान करना सबको प्रिय लगता है। इस गतिविधि में, बच्चों को भगवान शिव से संबंधित एक नाम या शब्द दिया जाएगा और उस नाम या शब्द से एक भजन गाने के लिए कहा जाएगा। यह गतिविधि बालविकास वर्ग में सिखाये गए भजनोँ को याद रखने में बच्चोँ को मददगार रहेगा और उनकी स्मरण शक्ति में सुधार आएगी । यह खेल बच्चों को एक भजन अंताक्षरी की तरह बहुत दिलचस्प लगेगा।

खिलाड़ी :
  • समूह I, II और III के बच्चे

समाहित मूल्य:
  • स्मरण शक्ति को बेहतर बनाना।
  • भजन गायन में रूचि पैदा करना।
  • संगठित होकर कार्य करने की भावना (टीम वर्क) को प्रोत्साहित करना।

सामग्री की आवश्यकता :
  1. एक कटोरी
  2. भगवान शिव के नामों एवं उनसे संबंधित शब्द लिखने के लिए कागज।
  3. समूह I और II पाठ्यक्रम के शिव भजनों के कुछ शब्द उदाहरण के लिए नीचे दिए गए हैं:
    1. विश्वेश्वर
    2. गिरिजापति
    3. कैलाश
    4. गौरी
    5. गंगाधर
    6. शंभो
    7. विभूति सुंदर

पूर्वभूमिका :

गुरु भजन गाने के महत्व को समझा सकते हैं और पिछली कक्षाओं में पढ़ाए गए भजनों का दोहराव भी कर सकते हैं। शिव के नाम या भगवान शिव से संबंधित शब्दों वाले छोटे-छोटे चिट तैयार करें।

खेल :
  1. बच्चों को समूहों में विभाजित किया जा सकता है।
  2. प्रत्येक टीम से एक बच्चे को कटोरे में एक चिट लेकर आना होता है।
  3. प्रतिभागी उसे अपनी टीम के साथियों को दिखा सकता है और चिट में लिखे हुए शब्द से संबंधित भजन ढूंढ सकता है। उन्हें गायन शुरू करने के लिए 30 सेकंड दिए जाने चाहिए।
  4. यदि टीम दिए गए समय के भीतर गाने में सक्षम है, तो उन्हें 10 अंक दिए जाएंगे। यदि वे विफल होते हैं, तो अगली टीम को उसी चिट को पारित किया जाएगा। यदि दूसरी टीम भजन गाने में सफल होती है तो उन्हें 5 अंक दिए जाएंगे।
  5. इस प्रकार सभी टीमों के साथ यह प्रक्रिया दोहराना चाहिए। यह तब तक खेला जा सकता है जब तक सभी टीम को मौका मिले।
  6. इसी प्रकार यह खेल भगवान कृष्ण, भगवान राम एवं सर्व धर्म भजनों आदि के लिए भी खेला जा सकता है।
मुद्रा प्रस्तुति
(भगवान शिव के नामों पर आधारित मूक अभिनय)



संवर्द्धित मूल्य :
  1. भगवान शिव के कई नामों को जानकर उनके अर्थों को याद रखना।
  2. याददाश्त बढ़ाने में सहायता।
  3. आत्मविश्वास में सुधार।

सामग्री की आवश्यकता :
  1. भगवान शिव के नामों की चिटें ।

पूर्व तैयारी :

गुरु खेल शुरू करने से पहले भगवान शिव के निम्नलिखित नामों के अर्थ समझा सकते हैं। इससे उन्हें नाम का अर्थ निकालने में मदद मिलेगी।

  • नीलकंठ :जिनका कंठ नीला है। विष्णु के कुर्मा अवतार के दौरान समुद्र मंथन करते समय शिव ने जहर पी लिया था। उन्होंने जहर को अपने शरीर में प्रवेश करने से रोकने के लिए अपने कंठ (गले ) में रोक कर रखा था।
  • मृगधर :जो अपने हाथों में एक हिरण रखते हैं। हिरण की चंचल गति की तुलना हमारे मन की बेचैनी से की जाती है। अगर हम प्रभु को अपने मन समर्पित कर दें तो वह उसे मजबूती से पकड़े रखेंगे।
  • नटराज :शिव का यह नाम उनकी अलौकिक नृत्य छवि को दर्शाता है।
  • गंगाधर :गंगा को धारण करने वाले। जिन्होंने गंगा को अपनी उलझी हुई जटाओं में धारण किया है।
  • चंद्रशेखर :जो अपने मस्तक के जटाओं में चंद्रमा (चंद्र) को धारण करते हैं।
  • अर्धनारीश्वर :शिव और पार्वती का संयुक्त रूप। जिनका दायां भाग पुरुष यानी शिव का और दूसरा आधा भाग नारी रूप में है।
  • त्रिपुरारी :जिन्होंने असुरों के राजा मायासुर के नगरों को नष्ट कर दिया। यह नगर न सिर्फ पृथ्वी, आकाश और स्वर्ग पर स्थापित था अपितु लोहे, चांदी और सोने से भी बना था|
  • त्रिनेत्र :जिनके तीन नेत्र हैं और जो सूर्य, चंद्रमा और अग्नि का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • भोलेनाथ :जो दयालु हैं और सभी के प्रति प्रेम रखते हैं।
  • भस्मभूषित :जिनके संपूर्ण शरीर पर भस्म (राख) लिपटी हुई है।
  • उमापति :जो उमा अर्थात पार्वती के पति हैं।
  • लिंगोद्भव :जिनकी उत्पत्ति लिंग के रूप में मानी जाती है।
  • त्रिशूलधारी :जो त्रिशूल धारण करते हैं।
  • हर :बुराइयों को हरने वाले (नाश करने वाले)।
  • कैलाशनाथ:कैलाश पर्वत के स्वामी। यहाँ वह एक योगी के रूप में रहते हैं। अत: कैलाश पर्वत प्रकाश, पवित्रता और आनंद का निवास स्थान है।

खेल की विधि :
  • प्रत्येक बच्चे को एक चिट उठाकर बिना कुछ बोले अभिनय द्वारा चिट में दिए गए शब्द के अर्थ को समझाना होगा। दूसरे बच्चे उस नाम (शब्द) का अनुमान लगायेंगे।
युवा शिल्पकार
(कैलाश पर्वत की निर्मिर्ती)


भगवान शिव और देवी पार्वती का दिव्य निवास स्थान , कैलाश पर्वत ,को बनाना है।

सामग्री की आवश्यकता :
  • किताबें / कुशन / बैग

समाहित मूल्य :
  • शारीरिक गत्यात्मकता, रचनात्मकता एवं संगठित होकर कार्य करने की भावना को प्रोत्साहित करना।

पूर्व तैयारी :
  • गुरु भगवान शिव की कथा सुना सकते हैं।

विधियाँ :

बच्चे इसे निम्नलिखित तरीकों से बना सकते हैं :
  1. बच्चे पहाड़ बनाने के लिए एक के ऊपर एक खड़े हो सकते हैं।
  2. पहाड़ के आकर में बच्चे अपने स्कूल बैग / लंच बैग्स का ढेर बना सकते हैं।
  3. बच्चे पहाड़ बनाने के लिए अपनी नोटबुक को पर्वत के आकार में ढेर कर सकते हैं।
  4. प्रत्येक बच्चा एक नोटबुक को खोल कर ,उसे उल्टा रख सकते हैं और अन्य किताबों को खुली किताब के ऊपर रख ढेर बना सकता हैं। इससे एक सुंदर पर्वत बनता है।
  5. बच्चे खड़े होकर अपने हाथों को सिर के ऊपर उठा कर एक सुंदर पर्वत की प्रतीति करवा सकते हैं।

इस गतिविधि को करते समय, बच्चे कैलाशराणा श्लोक या वन्दे देवम उमापतिम् का जाप कर सकते हैं अथवा शिव शम्भो हर हर शम्भो भजन गा सकते हैं। कैलाशराणा  

रस्साकशी
(खेल)

महाशिवरात्रि के शुभ और पवित्र अवसर पर, हम भगवान शिव को याद करते हैं और उस दयालु भगवान का नामस्मरण करते हैं, जिन्होंने सृष्टि को विषाक्त होने से बचाया और स्वयं अपने गले में हालाहल धारण किया।

सीखे जाने वाले मूल्य:
  • अच्छे संस्कारों का महत्व

आवश्यक सामग्री :
  • मोटी रस्सी / लंबी मोटी चादर

पूर्व निर्देश :

गुरु बच्चों को समझा सकते हैं कि भगवान शिव ने विष का सेवन करके कैसे पृथ्वी की रक्षा की। अन्य कहानियों पर भी चर्चा कर सकते हैं जिनमें बुराई पर अच्छाई की जीत होती है। एक अच्छे इंसान होने के महत्व के बारे में भी चर्चा करें साथ ही उन सदगुणों का वर्णन करें जो व्यक्ति को अच्छा बनाते हैं।

खेल की विधि:
  • बच्चे के दो टीम बना कर उनके बीच रस्साकशी का खेल कर सकते हैं। जो टीम जीतती है वह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतिनिधित्व करती है। खेल यहां रुक सकता है या चरण 2 में जारी रह सकता है।
  • भगवान शिव का अभिनय कर सकते हैं। :
    1. विजेता समूह अपनी टीम से एक बच्चे को भगवान शिव के रूप में बीच में खड़ा करने के लिए चुन सकता है और बच्चा हालाहल सेवन का अभिनय कर सकत है।
    2. अन्य बच्चे "हर हर हर महादेव" या "ओम् नमः शिवाय" या "शंभो महादेव" का जप कर सकते हैं।
शिवरात्रि रंगोली


शिवरात्रि का त्यौहार निकट आ रहा है!

जैसा कि शिव को भगवान महेश्वर के प्रिय नाम से भी संबोधित किया जाता है, वह रूप हमारे अंदर के बुरे गुणों को दूर करता है। शिवलिंग भगवान शिव की सृजनात्मक और विनाशकारी शक्ति का प्रतीक है| अनादि काल से लोग शिवलिंग की पूजा करते हैं और यह सभी शिव मंदिरों के गर्भगृह में पाया जाता है।

यहाँ एक वीडियो है जिसमें शिवलिंग की रंगोली के चरणबद्ध चित्रण को दर्शाया गया है! आइये इस शिवरात्रि पर हम इस सजीव और आकर्षक रंगोली को प्रस्तुत करके भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति और कृतज्ञता व्यक्त करें|