नवरात्रि गतिविधियाँ

नवरात्रि तत्वम् (सिद्धांत)
[ स्वामी के उपदेशों के अंश ]
भक्ति और उपासना

नवरात्रि या दशहरा भारतीय परंपरा में सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है और यह नौ दिनों की अवधि के लिए मनाया जाता है। यह त्यौहार भारत के विभिन्न हिस्सों में अपने स्वयं के अनूठे तरीकों से मनाया जाता है। स्वामी के अनुसार, नवरात्रि की सच्ची पूजा प्रकृति का अभिवादन करना है। हमें प्रकृति से प्यार और उसकी आराधना क्यों करना चाहिए? प्रकृति और भगवान के बीच क्या संबंध है? आइए जानें कि स्वामी का इस विषय पर क्या कहना है।

स्वामी के अनुसार, संपूर्ण सृष्टि का आधार प्रकृति है। प्रकृति की पूजा करना और प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। स्वामी बताते हैं कि हमारे हाथ में बीज का कोई मूल्य नहीं है। केवल जब वे जमीन में बोए जाते हैं, तभी वे वृक्ष के रूप में विकसित होते हैं और उनमें फल लगते हैं। यह धरती माता ही है जो इसे संभव बनाती है। तो, अस्तित्व के लिए, पृथ्वी आधार है। स्वामी आगे बताते हैं कि किसी भी चीज के सफल होने के लिए मानवीय प्रयास और दिव्य अनुग्रह दोनों की जरूरत होती है। प्राचीन काल से, प्रकृति की पूजा करना सभी प्राचीन संस्कृतियों में एक प्रथा थी। स्वभावतया प्रकृति की पूजा करना यह सुनिश्चित करता है कि हम माँ प्रकृति का दुरुपयोग न करें। माँ प्रकृति की पूजा करना देवी लक्ष्मी, देवी सरस्वती और देवी दुर्गा इन तीनों देवियों अथवा दिव्य माताओं की पूजा करने के समकक्ष है।

मात्र प्रकृति के लाभों का अनुभव और आनंद लेकर भगवान के अपार अनुग्रह को भूल जाना सही नहीं है।यही कारण है कि उपनिषदों ने प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। प्रकृति को नमस्कार अर्पित करना भी अच्छे कर्म करने का संकेत देता है। माँ प्रकृति तीन गुणों- सत्व, रजस और तमस से बनी है। माँ प्रकृति, जो उपरोक्त तीनों गुणों से बनी है, इसकी उपासना के पीछे एक आंतरिक महत्व है और यह है विचार, वचन और कर्म की पवित्रता। इससे ही हम ईश्वर का अनुग्रह प्राप्त कर सकेंगे।

स्वामी के अनुसार, एक सच्चा इंसान या एक महान व्यक्ति वह है जिसके पास विचार, वचन और कर्म की एकता है। केवल वही अंधकार या अज्ञानता को दूर कर सकता है। देवी लक्ष्मी जो सभी समृद्धि का प्रतीक हैं, उन्हें शुद्ध हृदय या विचार के रुप में दर्शाया जाता है। देवी सरस्वती जो वाणी और ज्ञान की देवी हैं उन्हें शुद्ध वचनों से दर्शाया जाता है और देवी दुर्गा जो शक्ति या ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती हैं वे शुद्ध या अच्छे कार्यों का प्रतिनिधित्व करती हैं। नवरात्रि एक त्यौहार है जो हमारे जीवन से अंधकार को दूर करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

सच्ची देवी पूजा वह है जिसमें त्रिकरण शुद्धि का पालन किया जाता है जिसका अर्थ है विचार, शब्द और कर्म की एकता और पवित्रता। नवरात्रि, मनुष्य को पवित्र मार्ग पर ले जाती है जिससे अहंकार के साथ-साथ अज्ञान का भी नाश होता है। आजकल, लोग त्यौहारों के अर्थ को समझने में ज्यादा मेहनत नहीं करते हैं। वे अनुष्ठानों और प्रथाओं को अंधवत् (बिना सोचे समझे) महत्व देते हैं। जैसे, दशहरे के लिए लोग बड़े करीने से गोलू (विभिन्न देवी-देवताओं के खिलौने और मूर्तियों की सजावट) की व्यवस्था करते हैं और उनकी पूजा अर्चना करते हैं। दिव्यता का अनुभव करना मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। पूजा यांत्रिक और कृत्रिम नहीं होनी चाहिए। बल्कि यह पूरी तत्परता और भक्ति से परिपूर्ण होनी चाहिए।

स्वामी के अनुसार, आंतरिक पूजा विचार, वचन और कर्म में पवित्रता प्राप्त करने के लिए है। बाहरी पूजा प्रकृति, देवी दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के प्रकट रूप की करना चाहिए। प्रकृति भूदेवी या धरती माता है। धरती माता हमारी सभी जरूरतों को पूरा करती है। वह बहुत उदार है। माँ प्रकृति ने हमें प्रचुर मात्रा में हमें कीमती उपहार दिए हैं और यह हमारा कर्तव्य है कि उसने हमें जो कुछ भी दिया है, उसकी रक्षा करें। हमें अपने दिए धन में से किसी का भी दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। हमें बिजली, पानी बचाना चाहिए और पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखने का प्रयास करना चाहिए। ओजोन परत क्षीण हो रही है। ओजोन परत हमें हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से बचाती है। इस परत के बिना सारा पानी वाष्पितकृत हो जाएगा और भविष्य में पानी नहीं होगा।

पर्यावरण को स्वच्छ रखने के कई तरीके हैं। हमें प्रदूषण कम करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। हम अधिक पेड़ लगा सकते हैं, हम काम पर जाने के लिए साइकिल का उपयोग अथवा सामूहिक रूप से कार का प्रयोग कर सकते हैं। हम पटाखे आदि को को फोड़ना टाल सकते हैं। क्या आप अन्य तरीकों के बारे में सोच सकते हैं? ध्वनि प्रदूषण भी आज एक बड़ी चिंता का विषय है।

क्या आपने कभी सोचा है कि नगरसंकीर्तन और भजन गायन भी आसपास के वातावरण को सकारात्मक और अच्छा कंपन देकर पर्यावरण को शुद्ध करने में मदद करते हैं? यह हमारे दिमाग को भी परिशुद्ध करता है।

तो, इस नवरात्रि, आइए हम आंतरिक पूजा करने और विचार, शब्द और कर्मों में पवित्रता प्राप्त करने का संकल्प लें। बाहरी उपासना के भाग के रूप में, आइए हम प्रकृति की आराधना करें ताकि उसके भरपूर उपहारों और धरोहर की रक्षा कर सकें।

[Ref:http://media.radiosai.org/journals/vol_12/01OCT14/Respect-nature-and-purify-thought-word-and-deed-dasara.htm]

Devi Resides in Everyone
(Tales of Sri Ramakrishna Paramahamsa)

It was a sunny morning in Mount Kailash. Lord Ganesha, the darling son of Shiva and Parvati decided to go outside and play. With a hop and a leap he was out in the garden.

He plucked and smelt fragrant flowers. He chased the multi-coloured butterflies. He climbed trees and ate the delicious fruits. He tried to catch the deer, but they were too fast for him. All the running about tired him. He sat under a tree. Just then he heard a mewing. It was his pet cat greeting him. He looked at it fondly. It walked up to him gracefully and climbed into his lap. It closed its eyes and cosily settled down for a nap.

Ganesh felt this was not right. It is bad to sleep in the day-time. He should not permit it. He roused the cat. It opened its eyes a little and gave a small mew in protest. Ganesh stood it on its hind legs. He would literally teach it a lesson; Stick in hand he asked pussy to repeat what he said. But the cat only blinked. It climbed back into his lap and closed its eyes again.

Ganesh was irritated. His pupil was getting disobedient. He caught hold of the pussy and scratched its face. The cat jumped out of his grasp and ran away. Ganesh smiled to himself. Cats will be cats. He roamed about in the garden for a little longer and then returned to the house.

He felt very hungry. “Is the food ready,mother?” he asked. Parvati looked at him smiling and said, “Yes, Ganesh, go, wash and come. I shall finish dressing my wounds.” Ganesh was puzzled. Wounds? He looked at his mother more closely. He got a shock. There were many ugly scratches on her lovely face. Ganesh became angry. “Mother, tell me who has done this to you? I shall tell Father and get the culprit punished.”

He was then in for another shock. Parvati said, “The culprit is none other than my beloved son Ganesh”. Ganesh could not make head or tail of what she was saying. “I hurt my dear mother! Impossible, even in a dream. And was I not all the while out in the garden? Perhaps some mischievous boy was in my guise and did this wicked deed.”

But Parvati only shook her head. “Ganesh, tell me, did you hurt anyone while playing in the garden?” “No, Mother,” said Ganesh “I had no companion to play with today”. “Then did you play with any animal and hurt it in anyway?” asked the mother.

Ganesh now remembered how he had punished the disobedient cat. But what had that to do with the scratches on his mother’s face? He questioned her.

Parvati smiled and said, ‘Ganesh, don’t you know I am the Mother of the whole Universe? It is I who live in all creatures. Therefore, when you hurt any creature you are actually hurting me as well”.

Ganesh bowed his head in shame. He now understood. He was only one of the children of the Divine Mother. She loves all her Children equally and suffers equally with all. Ganesh realised his mistake and told his mother, “Mother, from this day onwards, I will not hurt any person or any creature by thought or deed”.

We too should make the promise that Lord Ganesha made. And keep the promise. Only then can we be really the children of the Divine.

Printable Colouring Sheets
काटो और चिपकाओ गतिविधि

(कट और पेस्ट गतिविधि)

DRESS-UP DEVI
(Radiant Rangoli Art)

The Universal Mother is referred to as ‘Sarvaalankaara Yuktham’ and ‘Sarvaalankaara Bhooshathaa’: meaning She is adorned with different ornaments and is always dressed to perfection.

Dressing up the Divine Goddess is one way of showing our devotion to her. The Rangoli images of traditional timeless jewellery, drawn to perfection, will add to the beauty of the Divine Goddess. The striking Rangolis of the ornaments adorning the Devi, will beautify Her image and this image will effortlessly get etched in our hearts. The attention to minute and elaborate details in the given Ornamental Rangoli images,reflect the artist's dedication to the work! These ornate Rangolis will definitely help us to visualize the Divine Goddess in her greatest form radiating beauty, love, grace and compassion!

This Navaratri, let us try such radiant rangolis for Devi and kindle our art skills.

CROWN OR KREEDAM
NECKLACE
EARRINGS
BANGLES
JADAI SINGAARAM AND KUNJALAM (Hair Decoration)
ANKLETS
Rangoli by Janani Raghavan
Ornamental Rangolis for Mother Earth

As Navaratri is nearing, let us get ready to decorate our mother earth with a beautiful ornamental rangoli designs.

It is said that one of Goddesses Abirami’s Thaadankams (worn in the ears) which she threw, turned an Ammavaasya day to pournami (full moon ) for the great devotee Abiraama pattar.

The exquisite pieces of traditional Indian jewellery have been artistically and intricately drawn in the form of rangolis to enhance the beauty of the Navratri Festival. Age old images of the Divine Goddesses depict them adorning timeless pieces of jewellery with rubies, fiery diamonds, and serene pearls and more. These stunning rangolies of priceless jewellery and finery are definitely worth a try this Navratri!

NAVARATRI DAY – 1




NAVARATRI DAY – 2




NAVARATRI DAY – 3



NAVARATRI DAY – 4





NAVARATRI DAY – 5





NAVARATRI DAY – 6




NAVARATRI DAY – 7






NAVARATRI DAY – 8



NAVARATRI DAY – 9






Rangoli by Janani Raghavan
हरितिमा संग दिव्यता की ओर–पुराने अखबारों से ताम्बूलं बैग बनाना
(बालविकास के छात्रों के लिए नवरात्रि गतिविधि)

नवरात्रि के दौरान, ताम्बूलं (पान, सुपारी, फल आदि) देना हमारी परंपरा है और हल्दी, कुमकुम, पान, सुपारी, फल, उपहार आदि को सुसंबद्ध रूप से रखने के लिए एक छोटे बैग की आवश्यकता होती है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए, अब प्लास्टिक के थैलों की जगह बायो डिग्रेडेबल बैग्स (प्राकृतिक तरीके से नष्ट होने वाली थैलियाँ) का चलन शुरू हो गया है। यहां एक वीडियो है जिसमें दिखाया गया है कि पुराने अखबारों के साथ ताम्बूलं बैग कैसे बनाया जाता है।

एक अच्छी तस्वीर, हजार शब्द बोलती है और व्यक्ति की भावनाओं को भी दर्शाती है। यह हाथ से तैयार किए गए बैग की सुंदरता और उत्कृष्टता को जोड़ती है। यहाँ, बैग के केंद्र में 'साईं माँ' होने से "प्रेम" का संदेश फैलता है और बच्चों को ध्यान से बैग को संभालना सिखाता है!

इस नवरात्रि, आइए हम अपना प्रेम धरती माता को बेकार की चीजों से उपयोगी बनाकर दिखाएं!

श्वेत पद्मासन (सफेद कमल का आसन)
(हस्तकला - नवरात्रि प्रीत्यर्थ बाल विकास गतिविधि)


श्वेत कमल कीचड़ में खिलते हैं परंतु वे गंदगी से अछूते रहते हैं एवं अपनी सुंदरता तथा ताजगी को बिखेरते हैं। इस प्रकार कमल का फूल शुद्धता का प्रतिनिधित्व करता है और मनुष्य को नकारात्मकता से अप्रभावित रहने की प्रेरणा देता है।

यहां एक वीडियो है जिसमें दिखाया गया है कि देवी सरस्वती के लिए थर्मोकोल प्लेटों के साथ इस मनोहर 'श्वेत पद्मासन' (सफेद कमल का आसन) को कैसे बनाया जाए। दिव्य माँ की एक मूर्ति को केंद्र में रखा जा सकता है।

तो आइए इस नवरात्रि में इस सरल शिल्प को बालविकास वर्ग में सीखें और एक अनोखे श्वेता पद्मासन के साथ अपनी ‘गोलु’ सजावट में जादू जोड़ें!

STUNNING RANGOLIS
(For Our Divine Mother Earth)

As Navaratri is fast approaching, let us get ready to dress up our Divine Mother Earth with radiant rangoli designs. Here are few ‘stunning glittering ornamental rangolis’.
The Universal Mother is referred to as ‘Sarvaalankaara Yuktham’ and ‘Sarvaalankaara Bhooshathaa’: meaning She is adorned with different ornaments and is always dressed to perfection. The sacred texts on the Goddess, like Lalitha Sahsranaama, Soundaryalahari, Abirami Andhaadhi (Tamil verses), etc., always describe her ornaments and their significance.
It is said that Goddess Abirami once threw her Thaadankams (earrings) to turn an Ammavaasya day (no moon day) into Pournami (full moon day) to please her devotee ‘Abiraama Pattar’.
On this holy occasion of Navaratri, let us lovingly decorate and dress-up our Goddess with ‘jadai singaram’ & ‘kunjalam’ (Hair decorations), bangles, earrings and anklets, in the form of rangoli and glorify her beauty!
Let us meditate upon that Goddess, who has a body of the colour of saffron, who has three graceful eyes, who has a jewelled crown, who always has a captivating smile, who has Reddish flower in her hands, who is the ocean of peace and also one who adorns stunning and glittering ornaments.
And also let us try such radiant rangolis for Devi and kindle our art skills.

DRESS-UP DEVI - Rangoli Art

श्रीफल (नारियल) से निर्मित बहुउपयोगी धारक

समाहित मूल्य:
  • कचरे से कला बनाना
  • पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्रयास करना
  • धीरज
आवश्यक सामग्री:
  1. नारियल के खोल
  2. सैंड पेपर
  3. ऐक्रेलिक पेंट और ब्रश
  4. रंग-रोगन (वार्निश)
  5. फेविकोल या फेविस्टिक
  6. समाचार पत्र
  7. बुनाई सुई या रोलिंग पिन
गतिविधि:

  1. नारियल का एक आधा खोल लें और बाहरी हिस्से को बड़े करीने से रगड़ें।
  2. इसे सैंड पेपर से घिसें।
  3. खोल के आंतरिक और बाहरी हिस्से को रंग रोगन करें।
  4. खोल (शेल) को सुनहरे रंग में पेंट करें या खोल (शेल) को अधिक रंगीन बनाने के लिए उसके आंतरिक और बाहरी सतह को किसी को भी डिज़ाइन से चित्रित किया जा सकता है।
  5. बुनाई सुई या किसी पतले रोलिंग पिन का उपयोग करके, कागज को कसकर रोल करें।
  6. पतले पेपर रोल के साथ गोलाकार लपेट लें।
  7. यह कागज कुंडल धारक के लिए एक स्टैंड के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।.
  8. दो नारियल के गोले भी एक चिपकाए जा सकते हैं (जैसा कि ऊपर की तस्वीरों में दिखाया गया है), नीचे वाला को उल्टा रखने से, क्लिप, पिन आदि रखने के लिए धारक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  9. ये धारक नवरात्रि के गोलु के लिए एक आकर्षक कला वस्तु या अच्छे उपहार हैं।
नवरात्रि गोलु - गुड़िया
कचरे से कला (गतिविधि - नारियल के गोले से)

शामिल किये गए मूल्य:
  • बेकार सामग्री से उत्तम कला बनाना।
  • धीरज।
  • पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्रयास करना।
आवश्यक सामग्री:
  1. नारियल के गोले (आधा) - 3 गोले।
  2. सैंड पेपर
  3. ऐक्रेलिक पेंट और ब्रश
  4. वार्निश
  5. अनुक्रम या माला
  6. फ़ेविकोल या फ़ेविकिक
  7. दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती की मूर्तियाँ (प्लास्टिक या टेराकोटा या फाइबर में हो सकती हैं)
  8. समाचार पत्र
  9. बुनाई सुई।
पूर्व तैयारी:

गुरुओं को बच्चों को दशहरा या नवरात्रि के महत्व के बारे में बताना चाहिए। वे इस त्यौहार से संबंधित कुछ लघु कथाएँ / किंवदंतियाँ भी सुना सकते हैं।

गतिविधि:
गुड़िया बनाने की विधि:

  1. नारियल का आधा खोल लें और खोल के बाहरी हिस्से को बड़े करीने से रगड़ें।
  2. इसे सैंड पेपर से पोलिश करें।
  3. खोल के आंतरिक और बाहरी हिस्से को वार्निश करें।
  4. अब, खोल के अंदरूनी हिस्से को लाल रंग में रंग दें और इसे सूखने दें।
  5. दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती की मूर्तियों को सुनहरे रंग में रंगें।
  6. इसे सूखने दें।
  7. चित्र में दिखाए अनुसार मूर्तियों को नारियल के खोल के भीतरी भाग पर चिपका दें।
  8. नारियल के खोल की बाहरी परत को मोतियों से सिलसिलेवार सजाएं, जैसा कि ऊपर दिखाया गया है।
स्टैंड कैसे बनाएं:

  1. ऊपर की तस्वीर में दिखाए अनुसार, एक पतली छड़ बनाने के लिए, बुनाई की सुई या किसी भी पतली इस्पात की छड़ को अखबार से रोल करें (लपेटें)।

  2. पेपर रोल के साथ एक तंग कुंडल बनाएं जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।
  3. सुन्दर, सजीव और आकर्षक रंगों से कुंडल को पेंट करें।
  4. पेपर रोल स्टैंड तैयार है।
  5. अब पेपर कॉइल पर नारियल के खोल को मूर्ति के साथ चिपका दें।
  6. नवरात्रि गोलु गुड़िया तैयार हैं।

कुंदन रंगोली

समाहित मूल्य:
  • रचनात्मकता
  • धीरज
आवश्यक सामग्री:
  1. OHP शीट ट्रेस पेपर के साथ
  2. सेलो टेप
  3. सुनहरा या रंगीन मनका चेन (बीड चेन) या अनुक्रम
  4. कुंदन पत्थर या मल्टीग्रेन
  5. कपड़े का पेंट (फैब्रिक पेंट)
  6. कैंची
  7. फ़ेविकोल / फ़ेविगम / शिल्प गोंद
गतिविधि:

  1. ट्रेसिंग शीट पर किसी भी रंगोली पैटर्न की रूपरेखा तैयार करें।

  2. फिर, उपरोक्त चित्र में दिखाए गए अनुसार सेलो-टेप का उपयोग करते हुए ओएचपी शीट को ट्रेसिंग पेपर पर चिपका दें।
  3. ओएचपी शीट पर शिल्प गोंद के साथ प्रतीक की रूपरेखा ट्रेस करें।
  4. अब, OHP शीट पर अनुक्रम या मोतियों को चिपकाना शुरू करें।
  5. फिर, कपड़े के पेंट का उपयोग करके प्रतीक को रंग दें और चित्र में दिखाए अनुसार कुंदन पत्थरों या मोतियों से सजाएं।
  6. OHP शीट के अतिरिक्त हिस्से को काटें।
  7. नवरात्रि के दौरान गोलु के सामने सुसज्जित करें।
  8. विभिन्न नमूने (पैटर्न) इस तरह से किए जा सकते हैं, कुछ नमूने उदाहरण स्वरूप दिए गए हैं।


संपूर्ण राष्ट्र में नवरात्रि उत्सव
1. पश्चिम बंगाल, असम और बिहार


सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी - नवरात्रि के अंतिम चार दिन देश के पूर्वी भागों में दुर्गा पूजा के रूप में मनाए जाते हैं। दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल, असम और बिहार में सबसे लोकप्रिय त्यौहार है और बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार बुराई के प्रतीक महिषासुर पर अच्छाई की प्रतीक देवी दुर्गा की जीत के जश्न के रूप में मनाया जाता है।

2. गुजरात और महाराष्ट्र


संगीत की लय में घूमते हुए, गरबा और डांडिया रास के नृत्य के लिए महिला और पुरुष एकत्रित होते हैं। अश्विन माह के पहले नौ दिनों के दौरान डांडिया की छड़ें और ढोल की आवाज़ पूरे गुजरात में सुनी जा सकती है। भक्त उपवास रखते हैं और माँ शक्ति की पूजा करते हैं। शाम में, जीवन के स्रोत का प्रतीक - दीयों वाला एक मिट्टी का पात्र - जिसे ‘गरबी’ के नाम से जाना जाता है, शाम की आरती के लिए उपयोग किया जाता है।


महाराष्ट्रीयनों के लिए, नवरात्रि नई शुरुआत का प्रतीक है, इसलिए संपत्ति खरीदने या व्यावसायिक सौदे करने के लिए यह सबसे अच्छा समय माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपने सौभाग्यवती महिलाओं को आमंत्रित करती हैं; वे उनके माथे पर हलदी और कुम कुम लगाती हैं और उपहारों का आदान-प्रदान करती हैं। गुजरात की तरह ही, इन नौ रातों में से प्रत्येक रात्रि महाराष्ट्रियनों के लिए भी गरबा और डांडिया की रात है।

3. तमिल नाडु 


अन्य राज्यों की तरह, तमिलनाडु में भी इन नौ दिनों को मनाने का अपना अनूठा तरीका है। नवरात्रि के दौरान, वे देवी दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी की पूजा करते हैं। तीन दिन उनमें से प्रत्येक को समर्पित हैं। शाम को, रिश्तेदारों को घर पर आमंत्रित किया जाता है और उपहारों का आदान-प्रदान किया जाता है। विवाहित महिलाओं को चूड़ियां, बिंदी और अन्य आभूषण दिए जाते हैं। सबसे आकर्षक अनुष्ठान कोलु/गोलु है, जहां एक अस्थायी सीढ़ी को गुड़िया से सजाया जाता है, और पीढ़ी दर पीढ़ी इस परंपरा को कायम रखा जाता है।

4. पंजाब


अधिकांश पंजाबी नवरात्रि के पहले सात दिनों के लिए उपवास करते हैं, माँ शक्ति के सभी अवतरित रूपों का सम्मान करते हैं। हर रात, जागरण होते हैं, जहां भक्त धार्मिक गीत गाने के लिए इकट्ठा होते हैं। अष्टमी या नवमी के दिन, पड़ोस की नौ कुमारिकाओं को आमंत्रित करके उपवास तोड़ा जाता है, जिन्हें धन, भोजन आदि उपहारों से सम्मानित किया जाता है। इन लड़कियों को 'कंजक' के रूप में जाना जाता है, जिन्हें माँ शक्ति के नौ अलग-अलग शक्ति रूपोंका प्रतीक माना जाता है।

5. आंध्र प्रदेश


नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान, आंध्र प्रदेश के लोग ‘बतुकम्मा पंडुगा’ का जश्न मनाते हैं, नौ दिन महागौरी को समर्पित हैं, जो नारीशक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। इस दौरान, महिलाएं स्थानीय फूलों के साथ पारंपरिक शैली में फूलों के ढेर बनाती हैं और पूजा करती हैं। नवरात्रि के अंत में, इस ढेर को झील या किसी अन्य जल निकाय में विसर्जित किया जाता है।

6. केरल


केरल में, नवरात्रि शिक्षा के साथ जुड़ा हुआ है। चूंकि यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, केरलवासी इन दिनों को कुछ नया सीखने या शुरू करने के लिए सबसे शुभ मानते हैं। अंतिम तीन दिनों के दौरान, वे देवी सरस्वती की पूजा करते हैं और अपने घरों में उनकी मूर्ति के बगल में किताबें रखते हैं।

7. कर्नाटक


कर्नाटक में नवरात्रि को ‘नाडहब्बा’ के रूप में जाना जाता है और उसी तरह से मनाया जाता है जिस तरह से 1610 में महान विजयनगर राजवंश द्वारा मनाया जाता था। नवरात्रि का दसवां दिन - विजयदशमी, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है जब देवी शक्ति ने इस दिन राक्षस महिषासुर का मुकाबला किया और उसका वध किया था। विडंबना यह है कि मैसूर राज्य का नाम महिषासुर के नाम पर रखा गया था। दशमी के दिन, लोग सड़कों पर हाथी का जुलूस निकालते हैं और पूरे राज्य में प्रदर्शनियों और मेलों का आयोजन किया जाता है।

 8.दिल्ली


नवरात्रि उत्सव के अंतर्गत दिल्ली में रावण, मेघनाद, और कुंभकर्ण के पुतलों को सार्वजनिक मैदानों में या स्थानीय रामलीला के मैदानों में जमीन पर जलाते हुए देखना हमेशा से एक मंत्रमुग्ध करने वाले प्रसंग रहे हैं। इस अवसर पर नाना प्रकार की खाद्य पदार्थों की दुकानें और आनंदित करने वाली सवारियां (राइड्स) होती हैं। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। दशहरे और पूर्ववर्ती नवरात्रि की मुख्य विशेषता रामलीला प्रदर्शन है जिसमें रामायण के दृश्यों का विधान है।


9. हिमाचल प्रदेश


हिमाचल प्रदेश में नवरात्रि का उत्सव नवरात्रि के दसवें दिन होता है। बाकी राज्यों के विपरीत, हिमाचल प्रदेश में उत्सव तब शुरू होता है जब यह दूसरों के लिए समाप्त होता है। इसे कुल्लू दशहरा के रूप में जाना जाता है जो अयोध्या में भगवान राम की वापसी को चिह्नित करता है। नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान, वहाँ के स्थानीय हिंदू परिवार परस्पर मिलते हैं और देवी दुर्गा के प्रति अपना सम्मान प्रदर्शित करते हैं।

संपूर्ण राष्ट्र में नवरात्रि उत्सव

(प्रथम समूह के बच्चों के लिए गतिविधि)
समावेशित मूल्य:
  • यह जानना कि भारत के चार विभिन्न क्षेत्रों में नवरात्रि का त्यौहार विभिन्न शैलियों में कैसे मनाया जाता है।
  • नवरात्रि के रंगीन दृश्यों की कल्पना करना
आवश्यक सामग्री:
  1. भारत का नक्शा (नीचे उपलब्ध मुद्रण योग्य नक्शा)
  2. पत्रिकाओं या समाचार पत्रों से लिए गए विभिन्न कपड़ों, मिठाइयों, मूर्तियों आदि की छवियाँ (नीचे उपलब्ध मुद्रण योग्य चित्र)
  3. शिल्प गोंद / फ़ेविकोल
  4. कैंची
पूर्व तैयारी:
  1. देश भर में नवरात्रि समारोह पर निम्नलिखित बिंदुओं को उजागर करने के लिए गुरु रोचक जानकारी प्रदान करें।
  2. उत्तर भारत में, नवरात्रि, घर में 'माता की चौकी' और 'कन्या पूजा' की मेजबानी करके मनाई जाती है।
  3. पश्चिम भारत में, यह सुप्रसिद्ध 'गरबा नृत्य' के बारे में है, जो पुरुषों और महिलाओं दोनों द्वारा किया जाता है, और जो पारंपरिक रूप से 'चनिया चोली' और 'कुर्ता पायजामा' पहनते हैं।
  4. पूर्व में, लोग हर शाम दुर्गा पूजा करके सभी नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा करते हैं। महिलाएं सुंदर साड़ी पहनती हैं जबकि पुरुष कुर्ता पायजामा में।
  5. दक्षिण भारत में, विशेष रूप से तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में, सीढ़ियों पर गुड़िया की व्यवस्था करना एक अभ्यास है। इसे ‘गोलु’ कहते हैं। गोलु को देखने और हल्दी कुम कुम के लिए दोस्तों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों को आमंत्रित किया जाता है। केरल में, लोग सरस्वती पूजा करते हैं और किसी विशेष दिन पुस्तकों की पूजा करते हैं।
गतिविधि:
  1. बच्चे दशहरा से सम्बंधित चित्रों को इकट्ठा कर सकते हैं या नीचे उपलब्ध मुद्रण योग्य चित्र का उपयोग कर सकते हैं।
  2. इन चित्रों को देश के विभिन्न सम्बंधित क्षेत्रों में चिपकाएं।


संपूर्ण राष्ट्र में नवरात्रि उत्सव

(द्वितीय समूह के बच्चों के लिए गतिविधि)
समावेशित मूल्य:
  • यह जानना कि भारत के विभिन्न राज्यों में नवरात्रि का त्यौहार विभिन्न शैलियों में कैसे मनाया जाता है।
  • नवरात्रि के रंगीन दृश्यों की कल्पना करना
आवश्यक सामग्री:
  1. भारत के नक्शे का एक प्रिंटआउट लें या चार्ट पेपर पर नक्शा ड्रा करें (नीचे उपलब्ध मुद्रण योग्य नक्शा)
  2. पत्रिकाओं या समाचार पत्रों से लिए गए विभिन्न कपड़ों, मिठाइयों, मूर्तियों आदि की छवियाँ (नीचे उपलब्ध मुद्रण योग्य चित्र)
  3. शिल्प गोंद / फ़ेविकोल
  4. कैंची
गतिविधि के लिए उद्यत:
  • बच्चों को त्यौहार के तथ्यों के बारे में समझाएं और सीखने को सुदृढ़ करने के लिए एक छोटी प्रश्नोत्तरी का आयोजन करें।
गतिविधि:
  • बच्चे छवियों को इकट्ठा करें या प्रिंटआउट लें।
  • इन छवियों को मानचित्र के संबंधित राज्यों / स्थान पर चिपकाएं।